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Book review of ‘Rework’

Author – Jason fried and Devid heinemeier Hansson


The book “Rework” is one of the business books. This book good for beginners who want know about basics of business. This book works on strategy of “you need less than you think.” It means What you really need to do is stop talking and start working.

Author of rework says 5 things for those who starting business first time.

“If you’re going to do something, do something that matters.”


It means that if you want to do business or work which make a change in the world, then only you can do a meaning ful business. It means you are a part of something important.


“Stop putting down your self”

Many people feel shame and insecure thinking about small business. For that type of people author said ” Anyone who runs a business that’s sustainable and profitable weather it is big or small, should be proud.”

“Planning is guessing”

When you are planning for long term it means you are just guessing not doing planning. You have to plan but first short term.
That’s why author said ” Give up on the guess work. Decide what you are going to do this week not this year.”

But we have to plan because without plan success road may seem scary. Also don’t follow blindly a plan which have not any relation with reality.

“Learning from mistakes is overrated”

Here author want say that learning from mistakes is good thing but don’t do mistakes blindly. Just try to do less mistakes.

“Small is not just a stepping – stone. small is a great destination in itself.”

Small success is not a bad infact we have to avoid huge growth because it spurts too. They can cause you to skip right over your appropriate size.
So grow slow and observe things that how it’s working. It helps in your business to grow faster.

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Motivational

वक्त बहुत अच्छा मरहम है…..

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Motivational poetry

कठिन है रास्ता मगर……

कठिन है रास्ता
मगर, हम ढूंढ ही लेंगे
जिंदगी के हर मोड़ को
आसानी से हम
मोड़ ही देंगे
अपनी सोंच से
अपनी दुनिया ही बदल देंगे।
एक दिन हम अपना ही
इतिहास रच देंगे
जीवन जीने को
हम नया रुख देंगे।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

परेशानियाँ नहीं थी वजह….

परेशानियाँ नहीं थी वजह,
लिखने की।
लेकिन श्रेय,
परेशानियों को देती रही।
ढूंढ – ढूंढ के परेशान होती रही,
परेशानियों को।
कला खुद में थी,
और भटकती रही,
दुख की गलियों में।
चार साल में अब समझी,
की भावनाएँ दिल का खिलौना है।
जब चाहे जैसे चाहे
भावों को डालो।
चाहो तो हर पल खुश रहलो
और चाहो तो,
हर वक्त दुख के सागर में डुबो।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

गुणों का नाश

दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती है
इस पल कुछ और
दूसरे ही पल कुछ और
ये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।
कुछ ही पलों में,
जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।
जल्दबाज़ी से गुणों का,
फासला आजाता है।
गुण बनते हैं धीमी आँच पे,
जल्दबाज़ी से तो गुणों का
नाश ही होता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

इंसान देख शेर…

आज एक इंसान को देख,
शेर घबरा गया।
बोला में सिर्फ
जंगल में राज़ करता हूँ,
सामने तो दुनिया पर
राज़ करने वाला आ रहा
उस इंसान को देख
शेर भी सीधा चलना सीख गया।
उस शेर ने अब,
बोलना छोड़ दिया।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational Musings poetry

कुछ बदलता है

हर दिन, हर रात बदलते हैं,
वक्त बदलता है,
मौसम बदलता है,
हर साल के साथ,
हम भी बदल गए।
जैसे जैसे हम बड़े होते गए,
हमारी सोंच भी बदलते गए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

किश्तें जिंदगी की

जिंदगी बहुत कीमती है, हर वक्त हर कोई बस जीने के लिए कार्य करता है। हर कोई बस इसी कोशिश में लगा रहता है कि वो अपने जीवन को और बेहतर कैसे कर सकता है। जैसा कि आप विषय में देख सकते हैं यहाँ पर कुछ किश्तों की बात की गई है।
यहाँ पर किश्तों से मतलब बैंकों की किश्त नहीं है बल्कि जिंदगी के किश्तों से है। यानी समय समय पर जो समस्याएँ आती है वो जिंदगी की किश्त ही तो है। जिसे हमें समय समय पर हल करनी यानी चुकानी पड़ती है। जिंदगी बिना समस्याओं की तो होती ही नही। हर समय कोई न कोई समस्या हमे घेरे रहती है। और जो इन समस्याओं को हल कर के वे सकारात्मक सोंच से समस्याओं को तोड़ देता है। वो ही सही मायने में जिंदगी की किश्त भर पाता है।
जो इन किश्तों को समय समय पर भर पता है बस वही सुखी रह पाता है। इसिलए बैंकों के किश्तों भरना न भरना आपकी मर्जी है। लेकिन किश्तों में जिंदगी गुजारना जरूरी है।
इसका मतलब ये नही की आप परेशानियों से घिरे रहे। इसका मतलब है अपने आप जो समस्याएँ आती हैं उसे हल करना है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

भावों की पकड़

दिन रात सोंचना,
भागदौड़ फिर सोंचना,
कभी खुश होना,
कभी रोना,
कभी कभी,
गुस्सा न बर्दाश्त होना,
चलना फिर रुक जाना,
सारे लक्षण हैं हमसे,
भावों की पकड़ का न होना।
भावों की पकड़ में इंसान,
बहोत शांत होता है।
भावनाओं में बहने से,
इंसान ही बह जाता है।
शांत से अशांत होजाना,
सारे लक्षण हैं हमसे,
भावों की पकड़ का न होना।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

सोशल मीडिया और प्रेम

सोशल मीडिया और प्रेम का तो पता नही,
लेकिन सोशल मीडिया से प्रेम ज़रूर देखा।
कभी रात भर जागे,
कभी दिन भर ताकते रहे इसे।
हर भाव में इसे निहारा,
कभी संग बहुत समय बिताया।
कभी नेट धीरे होने से,
पूरा दिन मन लगा के काम किया,
नही तो सिर्फ उसके प्यार में डूबा ही देखा।

– मनीषा कुमारी