Categories
Motivational poetry

अपनापन अंधेरे से

अपनापन अपनापन,
अपनेपन की बात क्या करते हो,
कुछ पल की देरी से,
नाराज़ तुम होते हो।
रात तुझे पता है,
बस तू ही वो वक्त है,
जब कुछ लिखना भाता है।
अंधेरे का अपनापन मुझे,
खींच लाता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

ये मन है कि

समय आज कल,
बहुत जल्दी बीत जाता है,
सोंचते – सोंचते न जाने…
कहाँ ये खो जाता है
जाने अनजाने में…
बहुत कुछ कह जाता है,
ये मन है कि,
हर वक्त बोलता ही रहता है।
सुनता किसी की नहीं,
और करता बिना सोंचे समझे है,
कुछ गलत हो जाने पर दोष
इस दिल और दिमाग का लगता है।
फिर भी,
ये मन है कि,
हर वक्त चलता ही रहता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

जीत की बाज़ी

जिंदगी तुझसे शिकायत कैसी,
दुनिया की रीत ही ऐसी,
इस जहाँ में बहोत है तेज़ी,
फिर भी हाथों में होगी,
हमारी जीत की बाज़ी।

– मनीषा कुमारी

Categories
Musings poetry

शब्दों की हेरा फेरी

शब्दों की हेरा फेरी में,
बात बदल जाती है।
असल बात को छोड़,
शब्द झूठ के पीछे भागती है।
फूलों की कयारी में,
काँटों की आबादी है।
हर सच झूठ है,
यहाँ झूठ ही टिकने वाली है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

चिड़ियों की चेचेअहट

चिड़ियों की चेहचेआहट

बहोत रंग लाती है।

हर बाग में फूल खिलाती है,

जब चाहे तब उड़ जाती है।

सीमा, जाती और धर्म

कोई न उसे बाँट सकता।

जब जी करे,

तब चेहेकती है

उसका चेहचेहना दिल को लुभाता है,

हर परेशानी को भुलाता है।

चिड़ियों का चेहेकना,

बहोत रंग लाता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Musings poetry

कुछ नहीं लिखा

कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल बहुत थे।
आसमाँ में बादल,
और यहाँ विचार बहोत थे।
छलक रही थी,
विचारों की नदियाँ,
लेकिन विचार,
आपस में भीड़ रहे थे।
कहने को विचार,
लिखने को, आपस लड़ रहे थे।
कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल, बहुत आ रहे थे।

     – मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

ज़िम्मेदार इंसान

ज़्यादा हँसो तो,
पागल है
ज़्यादा दुखी हो
तो तनाव है।
इंसान तो,
हर वक्त बदनाम है।
कहने को,
जात – पात है
लड़ने को तो
हर वक्त तैयार है।
ऊपर बोली,
हर बात बेकार है।
अगर इंसान,
जिम्मेदार है।

     – मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

कुछ वक्त बिताना बाकी है…

सफ़र सबका जारी है,
अभी तो काफी चलना बाकी है।
जिंदगी के मोड़ में,
मुड़ना बाकी है।
थकने पर थोड़ा,
ठहरना बाकी है।
चलना तो हर वक्त है,
बस अपने संग,
कुछ वक्त बिताना बाकी है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

कर्ज़ न चुकाना

कर्ज़ लेकर न चुकाना,
वो भी एक पाप है।
कर्ज़ चुकाना,
हर किसी का फर्ज़ है।
सताना न किसी को ऐसे,
नहीं तो वो तुझे सतायेगा।
भगवान है हर जगह,
हर तरह से तुझे सतायेगा,
हर तरह से तुझे सबक सिखाएगा।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

जिंदगी की रफ्तार

जिंदगी की रफ्तार कुछ धीमी हो गयी,
मंदी के दौर में घरबन्दी हो गयी।
मई के महीने में भी,
यहाँ ठंडी हो गयी।

– मनीषा कुमारी