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Dairy Motivational poetry

दुपट्टा

दुपट्टे को क्या कहूँ,
ये तो है हथियार नया।
कभी बन जाता है, औज़ार मेरा
कभी श्रृंगार का सामान है,
कभी खुद की पहचान है,
कभी खुद का सम्मान है,
कभी खेलने की चीज़ नई,
कभी बढ़ता इससे,
आत्मसम्मान है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कल तेरा रोशन होगा

सताओ न शब्दों को,
तलवों पर न दो ज़ोर इतना।
आ रहा जो बुरा विचार तुम्हे,
ओझल हो जाएँगे कुछ क्षण में।
नकारात्मकता के तूफान में,
शक्तिशाली मन मस्तिष्क बना ।
बुरे बंदिशों को तू हटा,
दर्दनाक हादसों को तू बेहला।
ओझल कर दे बुरे विचारों को,
कल तेरा रोशन होगा।
ओझल हो जाएँगे कुछ क्षण में,
नकारत्मकता के तूफान सारे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

हार मिलती भी उसे है…

नकारात्मकता और सकारात्मकता की लड़ाई में
हर बार नकारात्मकता जीते ये जरूरी नहीं।
करते रहो संघर्ष विचारों संग,
हर बार हार मिले ये ज़रूरी नहीं।
हार मिलती भी उसे है जो जीतते हैं,
हारने वाले तो सिर्फ अनुभवों पर जीते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

हिम्मत, होंसला, होशयारी…

हिम्मत, होंसला, होशियारी
सब फिरती हैं मारी मारी
बस कुछ क्षण की है देरी
दुर्बुद्धि करती है दुश्मनी
हिम्मत होंसला होशियारी
सबको मारती बारी – बारी
छोटी सी चिंगारी से
जलाती है पूरी बारी।
हिम्मत होंसला होशियारी
हैं एक दूसरे की साथी
जब साथ हैं आती
पूरा जीवन है संभाल लेती।

               – मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कठिन है रास्ता मगर……

कठिन है रास्ता
मगर, हम ढूंढ ही लेंगे
जिंदगी के हर मोड़ को
आसानी से हम
मोड़ ही देंगे
अपनी सोंच से
अपनी दुनिया ही बदल देंगे।
एक दिन हम अपना ही
इतिहास रच देंगे
जीवन जीने को
हम नया रुख देंगे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

आदत है हमारी

आपको साथ लेकर चलना,
जिम्मेदारी है हमारी।
आपका साथ देना,
जिम्मेदारी है हमारी।
कोई क्यों पूछे,
मतलब साथ रहने का…
एक दूसरे का ख्याल रखना
आदत है हमारी।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

बादलों की रौनक

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आँखों में सपने हज़ार लेकर,
चले हैं कई विचार लेकर।
रौनक है हर जगह बादलों की
हम चले हैं,
बादलों को साथ लेकर
रास्तों पर बिजलियाँ गिरा कर,
चले हैं हम,
रास्ते बनाकर।
बादलों की रौनक
साथ लेकर।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

जीने की उम्मीद में…

जीने की उम्मीद में
जीते हैं सभी
सीखने के उम्मीद में
सीखते हैं सभी
फूल हर वक्त खिलता नहीं
कम भोजन से मुरझाते हैं सभी
जैसे बच्चा
कुछ देर खेलते ही थक है जाता
मनोदशा का भी
कुछ ऐसा है रिश्ता
जैसे बातों की गोद में
खेलता बच्चा।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational Musings poetry

पूरी बात तक नहीं करते

बरसों का याराना,
यूँ ही तोड़ देते हैं लोग।
न इन्हें दर्द होता है,
न इन्हें फर्क पड़ता है
समय से बाँध देते हैं
सबंध को ये लोग
बंद हो जाते हैं इनके मुँह
पूरी बात तक नहीं करते,
लगता है, खत्म हुआ मतलब हमसे,प
इसलिए अब मुँह फेर लिया करते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

मोबाईल की खुशबू में…

दौर, ज़माना और बचपन
सब बीत गया
पतझड़ के मौसम में
उस पेड़ से हर एक पत्ता गिर गया…
उस तालाब के
हर किनारे सूख गए..
नब्बे के दशक का बचपन
कभी सुनेहरा,
कभी कुछ काला लिख गया।
मिट्टी की खुशबू में
मिलता फूलों से बचपन,
हँसते – खेलते,
रोते – चलते बीत गया।
मोबाईल की खुशबू में,
बचपन कहीं खो गया।

– मनीषा कुमारी