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Musings poetry

नज़ारा मिला

यूँ बातों का हमे
गुब्बारा मिला,
आँधी का कोई
नज़ारा मिला,
हमारे बिना बोले ही
समुन्द्र में तूफान का
नज़ारा मिला।

           – मनीषा कुमारी

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Musings poetry

प्रेरणा तुम

प्रेरणा तुम बनी नहीं,
बनाई गई हो।
हम तुम पर कुछ,
बोलना चाहते नहीं थे,
हमसे तो बुलवाया गया है।
प्रेरणा तुम हमारी बनी नही,
बनाई गई हो।
नही तो ख्यालों में भी,
तुम्हारा ज़िक्र नही था।
तुम तो खुद हमारे पास,
चल कर आई हो।
हमने तो ख्वाबों में भी,
तुम्हारा ज़िक्र न किया।
तुम साक्षात हमारा,
रोज़ नाम लिया करती हो।
तुम तो हमारे मुस्कुराहट का,
गुणगाण किया करती है।
प्रेरणा तुम बनी नही,
बनाई गई हो।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

Master your time

In this quote money means expensive so use it cleverly.

Time management is similar to money management & we can clarify this statement also. See when we manage time and be regular in time management then you can give fix time to your work and when you become regular in your work then you can make money for regular, and it will handle or manage your home finance. Time management manage your life also. It will make you fit and strong physically and mentally both. In the book “Master your time master your life” Brain Tracy, who is the author of this book also said about time management.

◆ Time management is not as hard as you think

Time management is not a hard thing if you want success in your life. Brain Tracy also said about time management that in every type of time management you should have to focus on it. He also said not to be so serious that your timetable become boring, so give time to every type of work like stay connect to your hobbies, creative things also give time to your special friend and your family.

◆ Relaxation is also important

Sometime relaxation gives us more energy to work, so we can say that rest is a medicine, life & money. Also rest gives us peace in our life. It helps to stay fit, active and gives new ideas to work.

Don’t ignore your work

In time management don’t ignore your work. People think that time management is so boring that’s why they start ignoring just after the following two days.

If time is the reason which force you to ignore then don’t follow time. Just focus on what work you want to do in one day.

Like take your first work as morning walk, second work as today you are going to complete more file, for children we can say that take target to complete 2 chapters in 2 hours and third work is to do your hobby work like playing, reading, walking, writing etc. And just start working on it.

This type of time management follows by large percentage of people, and they like it very much because in this timetable you are your own boss, not time. That’s why it feels much relaxing.

To know more about time management motivation then you can buy Brain Tracy book “Master your time master your life” by clicking this link below https://www.amazon.in/gp/product/0143132024/ref=as_li_tl?ie=UTF8&camp=3638&creative=24630&creativeASIN=0143132024&linkCode=as2&tag=manisha0c2-21&linkId=20437148dc4762e4c5493308f75fb551

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Dairy microtale Motivational poetry

शाम से एक उलझन है..

शाम से एक उलझन है,
बेचैन करती बातें हैं,
की बोलना जरूरी है,
या बोलकर ही कोई पाप है।
जाने अनजाने में किसी से,
घूमने की बात कर ली,
किसी से बात करने की बात करली,
भले घूमने का इरादा हमारा,
जरा भी न था।
बातें तो खुद के सिवा,
किसी से न कि,
फिर इल्जाम ऐसा लगा,
जिसके बारे में हमने कभी,
कभी भी नही सोंचा।
हमे बात न करने आई,
वार्ना बातों की रंगोली बिखेरना,
हम भी जानते थे।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

सोशल मीडिया और प्रेम

सोशल मीडिया और प्रेम का तो पता नही,
लेकिन सोशल मीडिया से प्रेम ज़रूर देखा।
कभी रात भर जागे,
कभी दिन भर ताकते रहे इसे।
हर भाव में इसे निहारा,
कभी संग बहुत समय बिताया।
कभी नेट धीरे होने से,
पूरा दिन मन लगा के काम किया,
नही तो सिर्फ उसके प्यार में डूबा ही देखा।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

हिंसा की खेती

हिंसा की खेती लोगों के मन में है घुसी,
किसी घास की भांति कभी भी उपज है जाती।
हिंसा से इंसान खत्म होता है बात नही,
इसलिए हर बात का इलाज हिंसा नही।
ये हिंसा की खेती तो,
लोगों के मन में है घुसी।
महात्मा गांधी के ज्ञान के बाद भी,
फैल रही ये हिंसा भारी।

– मनीषा कुमारी

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biography Motivational

कृपाबाई साथिनधान : भारत की पहली महिला लेखक।

Krupabai Satthinadhan

कृपाबाई साथीनाधन भारत के प्रथम लेखिका थी भले ही इन्होंने अपनी किताबें अंग्रेजी में लिखीं थीं। इन्होंने कुल तीन किताबें लिखीं हैं जो कि समाज की परेशानियों से जुड़ी हैं। इन्होंने पहली पुस्तक अपनी भाई के मोत के बाद लिखी अपने भाई के ऊपर।

First book written by Krupabai

उनका जन्म 1862 में अहमदनगर में हुआ था। इनकी माता का नाम राधाबाई खिष्टि और पिता का नाम हरिपन्त था। इनके माता – पिता ने अपने धर्म मे बाद में परिवर्तन करा लिया था यानी हिन्दू से क्रिश्चयन धर्म को अपना लिया था। इनके पिता की मृत्यु बहुत पहले ही हो गयी थी तब लेखिका बच्ची ही थी। लेखिका के पिता के मृत्यु के बाद उनकी माता, लेखिका और उनके भाई भास्कर को लेकर अहमदनगर से कहीं और चली गयी। भास्कर हमेशा लेखिका को प्रोत्साहित करते थे और हमेशा लेखिका के जहन में ये बात डालते रहते थे कि अपनी किताबों को उधार देती रहा करो, इसके साथ ही कई सारे मुद्दों में वे लेखिका से बात किया करते थे। लेकिन भास्कर भी अब दुनिया में नहीं रहे उनका देहांत हो गया। उसके भाई के मोत के बाद लेखिका ने उनके भाई पर आत्मकथा सबंधी किताब लिखी जिसका नाम था “Saguna : A story of Native Christan life” । इसके बाद करूपाबाई ने दूसरी किताब लिखी ” Kamala, A story of Hindu life ” 1894।

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ये दोनों किताबें जाती, लिंग, जातीयता और संस्कृति की पहचान पर आधारित है। इन दोनों किताबों की विषय वस्तु सामान्य है। इन दोनों ही किताबों की विषय वस्तु है हमारे समाज में महिलाओं की दुर्दशा और समाज के ढाँचों वे लोकतांत्रिक ढाँचों पर भी नज़र डाली गई है। कमला और सगुण दोनों किताबें अलग – अलग डिग्री का सामना करते हैं। सगुण काफी हद तक आत्मकथात्मक है। लेखिका के धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने काफी संघर्ष के बाद एक अच्छी शिक्षा प्राप्त की। एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश किया।

कृपाबाई को अपने भाई के मोत का काफी आघात पहुँचा था जिसके बाद दो यूरोपियन ईसाई धर्म प्रचारक महिलाओं ने लेखिका के पढ़ने, लिखने और देखभाल के जिम्मा उठाया। उसे पढ़ने के लिए मुम्बई के बोर्डिंग स्कूल में डाल गया। वे कई चिकित्सक महिलाओं से मिली जो कि अमेरिकन थी। उनसे मिल कर लेखिका काफी प्रभावित हुई जिसकी वजह से लेखिका को दवाईयों में रुचि होने लगी। उन्होंने अपने पिता के धर्म प्रचार को समझा और एक चिकित्सक बनने का फैसला किया जो बिमार औरतों का इलाज कर सके, खास कर उन औरतों का जो पर्दा करती हैं। इसी बीच उनकी तबियत खराब होने लगी, फिर भी वे स्कॉलरशिप जीत गयी जिसमें उन्हें इंग्लैंड जाने का मौका मिला मेडिसिन पढ़ाई करने के लिए लेकिन लेखिका को इसकी इजाज़त नही दी गयी। इस वजह से उन्हें मद्रास मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिया गया 1878 में और फिर लेखिका अंतेवासी बनी आदरणीय डब्ल्यू. टी. साथिनधान जो कि जाने माने धर्म प्रचारक थे। लेखिका की शैक्षिक योग्यता शुरुआत से अच्छी थी लेकिन ज़्यादा काम करने की वजह से उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था, जिसके कारण उन्हें स्वस्थ ठीक करने के लिए उनकी बहन के पास पुणे भेज दिया गया 1879 में।

कुछ साल बाद वे मद्रास वापस आ गयी जहाँ पर लेखिका समूल साथिअन्धान से मिली और उनसे दोस्ती हो गयी, जो कि रेवरेंड के पुत्र थे। 1881 में कृपाबाई और समुल ने शादी करली। उसके तुरंत बाद समुल की नोकरी ब्रिक्स मेमोरियल स्कूल में हेडमास्टर के रूप में लग गयी जो कि ऊटकामुण्ड में कृपाबाई ने मुस्लिम लड़कियों के लिए स्कूल खोला चर्च मिशनरी सोसाइटी की मदद से, और लेखिका ने कई और लड़कियों को भी पढ़ाया। ऊटकामुण्ड एक हिल स्टेशन है जिसका वातावरण इतना अच्छा है कि लेखिका की तबियत हमेशा अच्छी रहती थी जिसके कारण उन्हें लिखने का काफी वक्त मिल जाया करता था, जिससे वे ज़्यादा से ज़्यादा लिखती थीं। ज्यादातर उन्होंने ” An Indian lady” के ऊपर लिखा था। तीन साल बाद लेखिका और उनके पति राजमुंदरी चले गए और वहाँ जाते ही लेखिका फिर बीमार पड़ गयी इसलिए वे वहाँ से कुंभकोणम में चले गए। लगातार उनके स्वास्थ्य में परिवर्तन आने के कारण वे काफी परेशान थीं, इसलिए फिरसे लेखिका हमेशा के लिए मद्रास आ गयी 1886 में। जहाँ आते ही उन्होंने एक बड़ा उपन्यास लिखना प्रारम्भ किया।

सगुण जो कि कृपाबाई की पहली किताब थी, उसे 1887 से 1888 में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के मैगज़ीन छापा गया था। इसी बीच उसका बच्चा का अपने जन्म तिथि के पूर्व ही देहांत हो गया जिसके कारण लेखिका बहुत ज़्यादा मायूस व उदास हो गई। इस कारण उन्हें ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण उनके शरीर में पता लगने लगे, लेकिन उन्हें ये बताया गया कि उनकी ये बीमारी जल्द ही ठीक हो सकती है। जब लेखिका को पता लगा कि उनके पास बहुत कम समय है जीने के लिए, तब उन्होंने कमला नाम की किताब में काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने आखरी साँस तक काम किया। आखिर में उनकी मृत्यु 1894 में हो गयी। लेखिका की मृत्यु उनके प्रशंसकों के लिके काफी चोंकाने वाली थी इसलिए कृपाबाई के मृत्यु के कुछ महीने बाद लेखिका की याद में एक स्कॉलरशिप रखा गया मद्रास मेडिकल कॉलेज में। साथ ही एक मैडल रखा गया मद्रास विश्वविद्यालय में दसवीं कक्षा की काबिल अंग्रेजी की छात्र के रूप में। उनके किताबों को आगे प्रकाशित किया गया और उनके उपन्यास को तमिल भाषा में अनुवादित किया गया।

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Motivational Musings poetry

इंतेकाम की आग

इंतेकाम वो आग है,
जो इंतेकाम से मिलकर,
आग का दरिया बना दे।
समुन्द्र जितने पानी से भी,
जिसकी प्यास न बुझे।
मिट्टी के छिड़काव से,
हर दरिया समान लगे।
फूलों के हार से,
फिर हर शमशान सजे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

समय के साथ

सब कुछ सीख जाता है,
सब कुछ जान जाता है,
हर बात मान लेता है,
हर कुछ ठीक हो जाता है,
खुद पर विश्वाश हो तो,
समय के साथ,
सब कुछ ठीक हो जाता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

शायद सच नही मेरा सच

शायद सच नही मेरा सच,
लेकिन कहने में कैसा खर्च।
लोगों की बातें,
लोगों की सोंच होती है।
हम कुछ भी कहे,
उनको गलत ही सोंचना होता है।

– मनीषा कुमारी