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अच्छाइयाँ भी देखी

दुखी तो हम भी हुए थे,
लेकिन गम बस,
कुछ लोगों को दिखा था।
आये थे पूछने पता किसी का
और वो हमारे हो गए।
सच है कि लोग बुरे हैं
दुनिया में, लेकिन
अच्छाइयाँ भी हमने देखी हैं।

– मनीषा कुमारी

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नकल

नकल करनी थी तुम्हे,
जो तुमने अच्छे सी की।
अब जिंदगी की नकल उतारोगे,
जिंदगी का भी अंत होता है।
तब ये नकल भी बंद होगा
नकल तुमने की थी
आगे बढ़ने के लिए
वही नकल तुम्हे,
पीछे कर देगी।
जो लोग तुम्हे आज
नकल के लिए हैं उकसाते,
वही अंत में तुम्हें
कोसते नज़र आएंगे।
बिखर जाओगे तुम
जब अपनों को ही
तुमसे मुँह फेरा देखोगे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

खुद को बदल लिया करते हैं…

आग ही थी जो,
आग लगा जाती है।
सच है कि हम भी रोते हैं,
ये आग आँसू बहा जाते हैं।
लोग कहते हैं कि तमीज़ नही,
वो जब तमीज़ में थे,
तो लोग बदतिमीजियाँ करते थे।
आज कल लोगों के चेहरे के साथ,
हम भी खुद को बदल लिया करते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

अच्छे लोग

अच्छे लोगों का लोग
इम्तिहान बहोत लेते हैं।
बुरे लोग तो यूँ ही,
अपनी झूठी मीठी बातों से
बच जाया करते हैं।
फँस जाते हैं वो लोग,
जो चालक नही बन पाते।
बस खुद में फंसे
रह जाते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

परेशान मन

परेशान मन ठीक वैसा है जैसे,
चौराहे पर खड़ी कई गाड़ियां।
जो लगी लक्ष्य तक पँहुचने में
और सब हैं अपनी जल्दी में।
लेकिन फँसे हैं सब ऐसे
जैसे कई धागे आपस में ही
खुद से उलझे बैठे हैं।
यहाँ सब रास्ते तो
खुद से उलझे बैठे हैं।    

– मनीषा कुमारी

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बातों का तरीका है जादू

सच है कि हर बार
लड़ाई नही होती।
बातों में कई नई
बात है होती।
बातों ही बातों में
जान पहचान भी है बढ़ती।
बस बात करने का, तरीका है जादू।
अच्छे से हुआ तो पहचान बढ़ती है,
बुरा बर्ताव हुआ तो लड़ाई बढ़ती है।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational

खुद निकाल देते हैं…

किसी के दिल से
निकल जाना ही सही
जब किसी के दिल में
भीड़ ज़्यादा हो
वर्ना खुद निकाल देते हैं
वो लोग उन्हें, जिन्हें
तुमसे ज्यादा, मतलब की
भीड़ पसंद हो।

– मनीषा कुमारी

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शर्म करके देखो

धूल से मिलना हो
तो पक्के नही,
कच्चे रास्तों से गुज़र के देखो।
जिंदगी में किसी का
ख़ौफ़ न हो तो,
थोड़ा शर्म करके देखो।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational

हम भी नाराज़ हैं..

इस बात से तो,
हम भी नाराज़ हैं।
जिस बात से तुम,
नाराज़ हो।
बस कुछ शब्दों ने,
बाँध रखा है।
वर्ना हम भी,
कब का तुम्हे छोड़ जाते।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

दिल और दिमाग की लड़ाई

दिल से दिमाग की लड़ाई हो गई,
छोटी सी बात पे इनकी पिटाई होगई।
दिल का कसूर इतना था बस की,
पूछ लिया उसने दिमाग से की,
तू कुछ भी करने से पहले,
इतना सोंचता क्यों हैं।

इसमें दिमाग ने कहा
मैं तेरी तरह नही की
कहीं पे भी भावनाओं में बह जाऊं
और कहीं पर भी दोखा खजाऊँ।
दिमाग हूँ सोंच समझ के ही फैसले लेता हूँ।

इतने में दिल कहता है सोंचने में
इतना क्यों इतराता है,
सोंच में भी जरूर किसी ने
तुझे उलझाया होगा,
किसी ने तुझे भी
अपने जाल में फँसाया होगा,
तू भी किसी बात से खूब रोया होगा।

दिमाग ने इस बारे में
बहोत सोंचा की बात तो ये ठीक करता है,
फिर भी अपनी बात में
मन में दबाए रखूंगा।

दिल को ये बात पता चल गई,
उसने दिमाग से ये बात कह दी
मन की बात दिल सब जानता है,
मन में जो भी बात रखेगा
वो बात घमंड, अकड़, गुस्से
के रूप में बाहर आएगी।

दिमाग भी थोड़ा संभला
फिर मन की बात उसने दिल से कही
तब थोड़ा दिमाग हल्का हुआ
अब वो हर बात दिल को बताता
दिल न सुने तो पन्ने को बताता।

– मनीषा कुमारी