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इतना भी निराश नही…

जिंदगी रूठी अब भी है,
निराशा अब भी बाकी है।
लेकिन इतना भी निराश नही,
की पल भर में पीछे हट जाऊं।
बहोत सोंचा है मेने,
की अभी तो मैने,
शुरुआत ही की है।
जाना अभी दूर है,
धीरे धीरे ही चलना है,
धीरे धीरे ही सही,
पा लेंगे मंजिल भी।

– मनीषा कुमारी

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Musings

हम तो हार गए

छोटी सी शुरुआत थी,
अंत तक पहुंचना था।
चलते चलते हम रुक गए,
बहोत परेशान हो गए।
अब सब कुछ छोड़ दिया,
क्या आगे बढ़े की,
जिंदगी धीमी हो गयी।
एक छोटी सी तकलीफ से,
हम तो हार गए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

लोग रंग बदल रहे!

सोंच सोंच के परेशान हूँ,

सोंच सोंच के हैरान हूँ।

आखिर किया कैसे तुमने ये,

शायद सही है ये बात

की जैसे स्पाइडर मैन को

मकड़ी ने काटा तो

वो स्पाइडर मैन बना।

उसी तरह लोगों को

गिरगिट काट रहे,

शायेद इसलिए लोग रंग बदल रहे!

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

ख्याल तो बहोत है

ख्याल तो बहोत हैं मन मे,
बस उन्हें बुनना बाकी है।
ख्यालों के इस रास्ते मे,
बिखरे हुए बादलों में,
इस बिखरती रोशनी का,
साथ भी पाया है।
विचारों के झरनों में
खुद को तपाया भी है।
बस नदियों के रास्तों को
बनाते बनाते जाना है,
विचारों के सागर में
मिलते जाना है।

– मनीषा कुमारी

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खुशी

खुशी का माहौल तो,
खुशी से है मिलता है।
खुशी की बातें तो,
खुशी से ही मिलती है।
खुशी वाली बात तो,
खुशी होने से मिलती है।
खुशी खुशी करते तो,
दिन गुजर जाता है।
खुशी का मौका तो,
ढूंढने पे मिलता है।

– मनीषा कुमारी

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क्यों न दोस्ती कर लें..

मन को डाँट के रखो,
तो और उलझ जाता है।
क्यों न दोस्ती कर लें,
मन और मैं।
साथ मिल कर्म करे,
साथ मिल घूमें,
साथ मिल पहोंचे,
मंजिल की डगर पर।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

शुरुआत करूँ

चलो शुरुआत में ले चलूँ,
चलो शुरू की कोई बात कहूँ,
बात कोई नई कहूँ,
नई दिन और रात शुरू,
कोई नई शुरूआत करूँ,
न रोऊँ न आलास करूँ,
दिन की शुरुआत करूँ,
शुरुआत से शुरुआत की,
मंजिल की शुरूआत करूँ।

– मनीषा कुमारी

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क्या दुश्मनी है, फूलों से

जानें क्या दुश्मनी है,
फूलों से लोगों को।
जैसे ही खिलने की कोशिश करे,
वैसे ही कोई मसलने आ जाता है।
जब भी कोई खुश हो उसे,
रुलाने आजाता है।

– मनीषा कुमारी

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बदनाम हो गई

छोटी सी आग थी कहीं जल रही,
बहोत खुशी से छोटी जगह लहरा रही।
किसी ने आके आग को उकसाया,
तो आग पूरे घर को जला गई।
पूरा घर जल के राख हो गया
और आग दहेक दहेक के रोने लगी,
की आग लगाई किसी और ने थी
और बदनाम ये आग हो गई।

– मनीषा कुमारी

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थोड़ा ठहर जाओ..

कुछ पल रुक कर ठहर भी जाना,
चलते चलते कभी रुक भी जाना।
क्यों निराश है जिंदगी से इतना,
मौका मिले तो बता भी देना।
नही कोई दुश्मनी किसी से
बस दो पल ठहर कर ज़रा सा,
सोंच लेने दो, तुम भी ज़रा
ठहर जाओ जिंदगी तो
चलती रहेगी, ज़रा ठहर कर
अपनों के साथ हो जाओ।
बस थोड़ा ठहर जाओ,
थोड़ा अपनों के साथ मुस्कुराओ।

– मनीषा कुमारी