Tag: poetry

  • ताकत सब में है…

    इस बात पर कोई दो मत नही की अगर हम सब कुछ सोंचने की ताकत रखते हैं तो सब कुछ करने की ताकत भी रखते हैं। ताकत सबमें होती है बस उसे पहचानने की जरूरत होती है। भले ही कोई छोटा हो या बड़ा हर कुछ करने की ताकत रखता है। हर इंसान में कुछ […]

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  • बदनाम हो गया….

    वक्त नहीं है, वक्त नहीं है,ये कह कह कर वक्त बदनाम हो गया।कहते हैं, वक्त से अच्छा कोई शिक्षक नहींऔर लोग कह रहे,वक्त तूने मुझे बर्बाद कर दिया।सच में इंसान ने किसी को नहीं छोड़ा,अब वक्त भी है इनके निशाने पे,ये वक्त भी बदनाम हो गया।लाख किस्म की जीवन शैली,सब के पास है उतना ही […]

  • Book review of “Trust”

    Compiler – Deo prakash Publisher – Humrooh publication house Trust is an anthology which is based on trust of many co- authors. They all wrote there trust story, poems and incidents related to trust in that book. You can find beginners and some very talented writers in this book. In some pages you are going […]

  • तेरा एहसास ही काफी है….

    Read my thoughts on YourQuote app at https://www.yourquote.in/manisha-kumari-uprk/quotes/teraa-ehsaas-hii-kaaphii-hai-teraa-ehsaas-hii-kaaphii-hai-ye-cldx5g

  • बोली के चाल ढाल….

    बोली के चाल ढाल का,पूरी दुनिया में खेल है।जो न सीख पाया ये चाल,वो इस दुनिया में फेल है।कभी नजरें करती हैं जादू,तो कभी लय का खेल है।कभी आये प्रलये,तो सोंच का खेल है।जीने के लिए,बस कुछ सलिकों का हेर फेर है।वर्ना क्या ज़रूरत थी,बोली विचारों की।जानवर भी तो जीते हैं,अपनी जिंदगी। – मनीषा कुमारी

  • दुपट्टा

    दुपट्टे को क्या कहूँ,ये तो है हथियार नया।कभी बन जाता है, औज़ार मेराकभी श्रृंगार का सामान है,कभी खुद की पहचान है,कभी खुद का सम्मान है,कभी खेलने की चीज़ नई,कभी बढ़ता इससे,आत्मसम्मान है। – मनीषा कुमारी

  • कल तेरा रोशन होगा

    सताओ न शब्दों को,तलवों पर न दो ज़ोर इतना।आ रहा जो बुरा विचार तुम्हे,ओझल हो जाएँगे कुछ क्षण में।नकारात्मकता के तूफान में,शक्तिशाली मन मस्तिष्क बना ।बुरे बंदिशों को तू हटा,दर्दनाक हादसों को तू बेहला।ओझल कर दे बुरे विचारों को,कल तेरा रोशन होगा।ओझल हो जाएँगे कुछ क्षण में,नकारत्मकता के तूफान सारे। – मनीषा कुमारी

  • हार मिलती भी उसे है…

    नकारात्मकता और सकारात्मकता की लड़ाई मेंहर बार नकारात्मकता जीते ये जरूरी नहीं।करते रहो संघर्ष विचारों संग,हर बार हार मिले ये ज़रूरी नहीं।हार मिलती भी उसे है जो जीतते हैं,हारने वाले तो सिर्फ अनुभवों पर जीते हैं। – मनीषा कुमारी

  • चाँद और तारे

    तारा नाराज़ है चाँद सेऔर चाँद नाराज़ है तारे सेरोशनी दोनों की अपनी नहींफिर भी परेशान हैं एक दूसरे से।चाँद और तारे दोनोंएक साथ होते पूरे।जो दोनों साथ न होते तोआसमान की खूबसूरती निचोड़े।                     – मनीषा कुमारी

  • तुम अभी आए भी नहीं….

    इंतज़ार करते करतेइंतजार फीका पड़ गया।किसी को हमारा प्यारतीखा पड़ गया। तुम्हें खुश करते-करतेहम दुखी हो जाते हैंतुम अभी आए भी नहींऔर हम तुम्हारे सपने सजाते हैं। खुद को अच्छा करते करतेबुरे रास्ते पर चले जाते हैंतुम अभी आए भी नहींहम तुम्हारा मिजाज़ सुधारना चाहते हैं। तुम्हारी फिक्र करते करतेहम खुद को भूल जाते हैंतुम […]