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चलो आगे बढ़े

अब तो सूरज भी देखो उग गया,
अब तो दिन भी शुरू हो गया।
अब तो दिल के सूरज को जगाओ,
अब तो ताजी हवा में, खुद को मिलाओ।
चलो लक्ष्य की तरफ बढ़े,
चलो आज कुछ नया करे।
कुछ नया सीखे,
चलो आगे बढ़े।

– मनीषा कुमारी

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दयालु मोर

एक सुंदर और प्यारा सा मौर था जिसकी सुंदरता पूरे जंगल में सभी जानवर से सुंदर था। वो मौर बहुत दयालु, नैक और बड़े दिल वाला था। उसकी सुंदरता के कारण कई लोग उससे जलते थे, लेकिन कई लोग उसे पसंद भी करते थे। उन जलने वालों को उसकी अच्छाई से कोई मतलब नही था। सिर्फ उसकी सुंदरता से जलते रहते थे। कुछ लोग तो यूँ ही उसे सामने से ताने सुना कर चल दिया करते थे। इस वजह से मौर थोड़ी दैर के लिए दुखी हो जाता था लेकिन फिर वो अपनी किसी भूल का प्रयाश्चित समझ कर सह लेता था।

लेकिन जब लाख सुधार करने पर भी कुछ नही हुआ तो उसने उन लोगों को जवाब देना शुरू कर दिया। उसे लगा कि इससे वो सभी चुप हो जाएंगे। लेकिन इस वजह से उसे और ज़्यादा ताने सुन्ने पड़े इन सब से तंग आकर उसने खुद के रूप को तहस नहस कर दिया, इससे उसे काफी चोटें आई वो कमज़ोर पड़ गया। उसकी खूबसूरती मिट गई लेकिन उसकी अच्छाई अब भी जिंदा थी।

मौर ने ये सब उन सबको खुश करने के लिए किया था जो उससे न खुश थे। कुछ देर बाद उसे पता लगता है की वे लोग जो उसे ताने देते थे अब वो उसे कोसने लगे कि ऐसे बतसुरत को तो जीवित ही नही रहना नही चाहिए, इसे तो यहाँ से भगा देना चाहिए। इससे मौर बहोत उदास हो गया और इस वजह से उसने कहीं भी आना जाना बंद कर दिया। जब कई हफ्तों तक उसके दोस्त मिठू ने, जो कि एक तोता है मौर से मिलने की सोंचा। जब वो अपने दोस्त के पास जाने के लिए निकला तो उसने अपने दोस्त के बारे कई बातें सुनी। वो लोग उसके दोस्त के बारे में कई अच्छी बुरी बातें बोल रहे थे एक ने तो तोते को ये भी बताया कि उसका दोस्त मौर कई दिनों से घर से बाहर ही नही निकला है। तब मिठू को चिंता होने लगी और वो अपने दोस्त के पास जल्दी से पहोंचा।

उसके घर पहोंच कर उसने मौर का हाल पूछा तब उसने आप बीती सुनाई। इस बात पर तोते ने उससे सवाल पूछा की तुम अपने लिया जीना चाहते हो कि दूसरों के लिए। क्योंकि खुद के लिए जी कर दूसरों को खुश रखना मुश्किल है क्यूंकि आज तक जिसने भी ये कोशिश की है वो निराश होकर ही जिंदगी से विदा ले जाता है। खुद पर विश्वाश रख कर आगे बढ़ोगे तो कई लोग तुमसे जलेंगे और कई ऐसे भी होंगे जो तुमसे बहोत खुश होंगे इसलिए दूसरों पे ध्यान देने के बजाए खुद की प्रगति पर ध्यान दो। और मुझे पूरा विश्वाश है कि तुम बहोत नेक काम करते हो और करते रहोगे। ये बात सुन मौर में बहोत हिम्मत आगई और उसने कई अच्छे अच्छे काम किये। पग पग होने वाली हर परेशानी को शिक्षिक बना कर आगे बढ़ा और आलोचकों पर ध्यान न देते हुए उनसे भी सीखा। इस बात के लिए आज भी वो अपने दोस्त तोते को धन्येवाद करता है।

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प्रकृति पुकारे

प्रकृति पुकारे द्वारे द्वारे
ये द्वार भी खत्म हुए
हर ओर भटकी ये प्रकृति
व्यथा सुनाए इंसान को
इंसान ये कैसा है,
ये तो किसी की न सुनता है,
सच है कि सबका वक्त आता है,
तू जैसा प्रकृति को देगा
तू वैसा ही पायेगा
सदा करेगा सेवा प्रकृति की
तो सदा खुश रह पायेगा।

– मनीषा कुमारी

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ठंड का मौसम

पानी भी पानी से मिलने को तरसे,
प्रकृति अब तो सूखे से तरसे,
बिन मौसम बरसात के बदले,
बिन मौसम गर्मी आयी है।
डर तो इस बात का है बस
की ठंड का मौसम
इस दुनिया से न खत्म हो जाए।

– मनीषा कुमारी

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कलियाँ

कलियां भी खिल जाती हैं,
खुद ब खुद बस कोशिश करते ही।
तो क्यों जोड़ लगाता है इंसान,
कलियों को फूल बनाने में।
भले ही पता है उन्हें
बिखर जाएंगे वो
कुछ भी उनके करने से।

– मनीषा कुमारी

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जब सब खत्म हो जाता है

प्रकृति की तो हर चीज़
काम आजाती है।
आवारा बदल भी
सूरज के सामने आ
छाँव दे जाता है।
यहाँ अपना ही अपने को
दुख दे जाता है।
प्रकृति से ही ऊर्जा लेकर
ये खुद को देता है।
फिर अपने लिए
प्रकृति को ही
ठेस पहुंचा जा जाता है।
जाने क्यों जब
सब खत्म हो जाता है,
तो किसी की
उपयोगिता समझ आती है।

– मनीषा कुमारी

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फूलों की खान

फूल खिले गुलदस्ते बने,
बनते बनते वो मिट गए।
उजड़ गए सारे बागीचे
अब फूल कहाँ से लाये।
जब सुनसान हुए
एक एक बागीचे।
तो समझ है आई,
की काश लगाए होते
फूलों के पौधे,
उखाड़ने के साथ,
तो आज खाली न होता
मैदान वीरान,
होते इसमें फूलों की खान।

– मनीषा कुमारी

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सपनों की दुनिया में

सपनों की दुनिया में,
खोना अच्छा है।
कभी आराम करना भी
अच्छा है लेकिन,
इतना न खोना कभी
की खुद को ढूंढ न सको।
ढूँढली मंजिल जो तुमने
तो रास्तों को न छोड़ना।
कुछ देर रुके हो
अब आगे बढ़ते ही जाना।

– मनीषा कुमारी

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सावन की बहार

चिड़ियों की धुन
और बारिश की बूंद
दोनों ही सुकून भरी।
ये हरि सी हरियाली और
छायों से भरा अम्बर,
किसी किसी की ही
ये पसंद बनी।
तो किसी को इनसे,
कीचड़ की शिकायत है
और किसी को इनसे
पकवानों की इंतजार।
लगता है जैसे ये है
सावन की बहार।

– मनीषा कुमारी

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Stray animals are also have their life

In every place and in every street we see animals and we also see that they are in a poor condition. Their is a reason behind this poor condition and these are lack of food, lack of home and also because of some people throw stones or beat the stray animals without any reason. Some of them throw stones on animals because of fear also but truth is that some animals are scared of human beings too.

People have to understand that animals are also living thing and they have their own life as well. So, don’t hurt stray animals because they have a family too. Government started organization whose name is “people for animal” which is started for animals. This organization was started by maneks gandhi on 1992. This organization help those poor animals.

I just want to say that don’t teas stray animals, don’t scare after seeing wild stray animals; in this situation just walk away from that place instead of throwing stones on them and one last thing I want to say that if you want to have a pet then take it from a street and if you are not able to feed or care that animal then don’t pet any animals. If you give you care and respect to animals then they also give care and respect to you.