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Motivational Musings poetry

कुछ बाकी है..

लिखना तो कुछ नही
लेकिन लिख कर भी
बहुत कुछ लिखना बाकी है।
कई शब्दों को पढ़ना,
कई किताबों को टटोलना बाकी है
नही है जिंदगी, फिर भी
जीना बाकी है।
हर मुश्किल के बाद भी
परेशान होना बाकी है।
उदास बहुत हैं,
लेकिन खुश होना बाकी है।
जिंदगी की राह में अभी,
बहुत दूर चलना बाकी है।
देखो कहीं,
जिंदगी रो तो नही रही,
अभी बहुत रूठना बाकी है।
जिंदगी की राह में
बहुत दूर चलना बाकी है
न जाने कौनसा गिला है हमें
की हमें गिर कर फिर,
उठना बाकी है।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

नज़ारा मिला

यूँ बातों का हमे
गुब्बारा मिला,
आँधी का कोई
नज़ारा मिला,
हमारे बिना बोले ही
समुन्द्र में तूफान का
नज़ारा मिला।

           – मनीषा कुमारी

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प्रेरणा तुम

प्रेरणा तुम बनी नहीं,
बनाई गई हो।
हम तुम पर कुछ,
बोलना चाहते नहीं थे,
हमसे तो बुलवाया गया है।
प्रेरणा तुम हमारी बनी नही,
बनाई गई हो।
नही तो ख्यालों में भी,
तुम्हारा ज़िक्र नही था।
तुम तो खुद हमारे पास,
चल कर आई हो।
हमने तो ख्वाबों में भी,
तुम्हारा ज़िक्र न किया।
तुम साक्षात हमारा,
रोज़ नाम लिया करती हो।
तुम तो हमारे मुस्कुराहट का,
गुणगाण किया करती है।
प्रेरणा तुम बनी नही,
बनाई गई हो।

– मनीषा कुमारी

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खुश रहने का यही उपाए…

जाने हर कोई,
खुशियों के फूलों को,
बस उसे उगाना भूल जाते हैं।
लोग कितना भी करे काम कोई,
व सुबह खुश होना भूल जाते हैं।
खुश रहने का यही उपाए,
हर कोई भूल जाते हैं।

– मनीषा कुमारी

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इंतेकाम की आग

इंतेकाम वो आग है,
जो इंतेकाम से मिलकर,
आग का दरिया बना दे।
समुन्द्र जितने पानी से भी,
जिसकी प्यास न बुझे।
मिट्टी के छिड़काव से,
हर दरिया समान लगे।
फूलों के हार से,
फिर हर शमशान सजे।

– मनीषा कुमारी

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समय के साथ

सब कुछ सीख जाता है,
सब कुछ जान जाता है,
हर बात मान लेता है,
हर कुछ ठीक हो जाता है,
खुद पर विश्वाश हो तो,
समय के साथ,
सब कुछ ठीक हो जाता है।

– मनीषा कुमारी

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बादलों ने सूरज से…..

बादलों ने सूरज से सीखा,
खिलना फिर रंगों में घुलना।
रात के अँधेरे के बाद,
फिर से खिल कर बिखर जाना,
हर पल खुद को बदलना।
कभी कभी मिल कर,
फिर जम के बरस जाना।

– मनीषा कुमारी

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गंभीरता चली गयी…

झूटी दुनिया की,
झूटी बातें,
चुभती तो बहोत है,
लेकिन सच है,
की अब आदत सी है।
आज कल हम बातों को,
गंभीरता से लेते नही।

– मनीषा कुमारी

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आँखों की नमी

उदासी कम नही होत,
आँखों की नमी,
कभी खत्म नही होती।
आँखों की तकलीफें ,
सिर्फ दिल जानता है।
इंसान तो खुद के ही,
आँखों की नमी से अनजान रहता है।

– मनीषा कुमारी

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मार्च का महीना

मार्च का महीना,
जैसे रंगों की कली,
फूलों से भरी।
किसी के लिए ये माह,
परेशानी है लाता,
परीक्षाओं की बाढ़ में,
इनको डुबाता।
कोई कहीं रंगों में है डूबा,
किसी की नई शुरुआत है होती,
जिंदगी में कोई और है आता।

– मनीषा कुमारी