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Motivational Musings

क्यों न दोस्ती कर लें..

मन को डाँट के रखो,
तो और उलझ जाता है।
क्यों न दोस्ती कर लें,
मन और मैं।
साथ मिल कर्म करे,
साथ मिल घूमें,
साथ मिल पहोंचे,
मंजिल की डगर पर।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

संस्कार सीखा रहे..

संस्कारों की बात वो कर रहे,
जिन्हें अपनी संस्कृति तक नही पता।
जिस मुँह से वो संस्कृति का,
गला घोंट चुके हैं।
आज वो उसी मुँह से
संस्कार सीखा रहे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

कलियाँ

कलियां भी खिल जाती हैं,
खुद ब खुद बस कोशिश करते ही।
तो क्यों जोड़ लगाता है इंसान,
कलियों को फूल बनाने में।
भले ही पता है उन्हें
बिखर जाएंगे वो
कुछ भी उनके करने से।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कुछ लोग

कुछ लोग बुरा होके,
बुरे ही रहते है।
खुद बुरे होते हैं,
दूसरों को भी बुरा ही समझते है।
खुद के घटिया दिमाग से,
औरों को दूषित करते है।

– मनीषा कुमारी

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Musings

जिंदगी उदास बहोत है..

बहोत दूर है जिंदगी,
जो रोती बहोत है।
जिंदगी चलती बहोत है,
पीछे हटती बहोत है।
खो गया हो कुछ जैसे,
जिंदगी उदास बहोत है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

मूर्ख कहे, कि बुरे लोग

हम जान बुझ के हार गए,
वो हमे ताने देने लगे।
हमने उनसे माफी मांगी,
की कहीं झगड़ा न होजाये।
वो तो अपना अहम बताने लगे।
हम पीछे हट गए ,
कि बात न बढ़ जाय,
वो तो अपनी ताकत बताने लगे।
सच बात है कि ऐसे लोगों को
मूर्ख कहे, कि बुरे लोग,
ये बताना किसी,
नेक के बस की बात नही।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

मजबूरी बहोत है…

भरोसा तो किसी पे नही मुझे
लेकिन भरोसे करने की,
मजबूरी बहोत है।
चाहती तो कुछ भी नही
किसी से लेकिन,
मजबूरी बहोत है।
परेशान तो हूँ, हर किसी से
लिकेन परेशान होने की,
मजबूरी बहोत है।
चले तो जाते कबका
इस दुनिया से लेकिन,
रुकने की मजबूरी बहोत है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

भगवान

बुरा वक्त चाहे
कितना भी बुरा हो
लेकिन माँ-बाप कभी
साथ नही छोड़ते।
ऊपर वाला भी बड़ा
मेहरबान रहता है,
उस वक्त जिस वक्त
किसी के माँ-बाप
साथ नही रहते।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

नफरत की आग

कैसी है ये दुनिया
कैसा है ये मानव
नफरत से नफरत की आग में,
सारे हैं अभिमान में,
जान के ये दुनिया की रीत,
झुलस रहे नफरत की आग में।
धन दोलत तो है ही वजह,
बिन वजह भी नफरत है छाई।

– मनीषा कुमारी

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मज़ाक बनाने वालों

जिनकी खुद की जिंदगी का कुछ पता नही,
वे हमें जिंदगी जीना सीखा रहे ।
जो खुद न बोल पाते एक शब्द सही से ,
वो हमे बोलना सीखा रहे।
दूसरों का मज़ाक उड़ाने वालों ,
तुम खुद एक मज़ाक ही हो।

– मनीषा कुमारी