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Motivational Musings

नकल वाले चेहरे

नकल वाले चेहरे हज़ार देखे हैं
नकल करने वालों पे तो हमने
पहचान वालों का ही, हाल बेहाल देखा है
नकल करने को जो मिले इन्हें
पा लिया अमृत लगता है।
कोमल से खुद के शरीर को
जरा आजमा के दखो।
नकल करने में शायद
अफसोस हो जाये।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

सिख लिया

मैने जीना सीख लिया
इस भीड़ की जहां में
मैने रहना सिख लिया।
दो पल की बात भी
दिल दुखा देती है
हमने बिन बातों के भी
रहना सिख लिया।
इस भीड़ की जहां में
अकेले रहना सिख लिया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

तुम समझ नही आते हो

तुम समझ नही आते हो,
तुम उलझा बहोत जाते हो,
दुनिया आगे निकल गयी।
सब कुछ पीछे छूट गया
कोई झलक तो मिले तुम्हारी
लेकिन तुम तो कभी
आते ही नही हो।
कभी मिलने की
कोशिश तक नही करते
क्या हुआ है जो,
तुम हमसे मिलते नही हो
पुराने किताबों के बीच फंसी हूँ
कभी तो नई किताबों की बरसात हो।

– मनीषा कुमारी

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Musings

हम तो हार गए

छोटी सी शुरुआत थी,
अंत तक पहुंचना था।
चलते चलते हम रुक गए,
बहोत परेशान हो गए।
अब सब कुछ छोड़ दिया,
क्या आगे बढ़े की,
जिंदगी धीमी हो गयी।
एक छोटी सी तकलीफ से,
हम तो हार गए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

लोग रंग बदल रहे!

सोंच सोंच के परेशान हूँ,

सोंच सोंच के हैरान हूँ।

आखिर किया कैसे तुमने ये,

शायद सही है ये बात

की जैसे स्पाइडर मैन को

मकड़ी ने काटा तो

वो स्पाइडर मैन बना।

उसी तरह लोगों को

गिरगिट काट रहे,

शायेद इसलिए लोग रंग बदल रहे!

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

ख्याल तो बहोत है

ख्याल तो बहोत हैं मन मे,
बस उन्हें बुनना बाकी है।
ख्यालों के इस रास्ते मे,
बिखरे हुए बादलों में,
इस बिखरती रोशनी का,
साथ भी पाया है।
विचारों के झरनों में
खुद को तपाया भी है।
बस नदियों के रास्तों को
बनाते बनाते जाना है,
विचारों के सागर में
मिलते जाना है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

क्यों न दोस्ती कर लें..

मन को डाँट के रखो,
तो और उलझ जाता है।
क्यों न दोस्ती कर लें,
मन और मैं।
साथ मिल कर्म करे,
साथ मिल घूमें,
साथ मिल पहोंचे,
मंजिल की डगर पर।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

संस्कार सीखा रहे..

संस्कारों की बात वो कर रहे,
जिन्हें अपनी संस्कृति तक नही पता।
जिस मुँह से वो संस्कृति का,
गला घोंट चुके हैं।
आज वो उसी मुँह से
संस्कार सीखा रहे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

कलियाँ

कलियां भी खिल जाती हैं,
खुद ब खुद बस कोशिश करते ही।
तो क्यों जोड़ लगाता है इंसान,
कलियों को फूल बनाने में।
भले ही पता है उन्हें
बिखर जाएंगे वो
कुछ भी उनके करने से।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कुछ लोग

कुछ लोग बुरा होके,
बुरे ही रहते है।
खुद बुरे होते हैं,
दूसरों को भी बुरा ही समझते है।
खुद के घटिया दिमाग से,
औरों को दूषित करते है।

– मनीषा कुमारी