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Motivational Musings

जाने क्या सोंचकर

जाने क्या सोंचकर,
हालातों को छोड़ कर।
बैठा किसी मोड़ पर,
वो आवाज़ दे रहा।
देखलो ध्यान से,
देख मंजिल की राह पर,
कहीं ध्यान तो नही मोड़ रहा।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Musings

दोस्ती और दुनिया

दोस्तों की दोस्ती,
यारों की यारी।
आयी सबकी बारी,
ये दोस्तों की नामावली।
दोस्ती है अपनी तगड़ी,
ये बातों की रैली।
लगे है दुनिया,
जैसे हो जलेबी।
तू हो संग,
तो लगे है दुनिया,
जैसे कोई सीधी सी जलेबी।

– मनीषा कुमारी

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Musings

डर लगता है…

कौन कब बदल जाये,
ये डर लगा रहता है।
कौन कब बिगड़ जाये,
ये डर लगा रहता है।
डर से मुलाकात तो,
बहोत हुई रास्ते में,
लेकिन डर से भी,
कभी कभी डर लगता है।

– मनीषा कुमारी

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Musings

खिलोने टूट जाते हैं

खिलोने टूट जाते हैं,
सपनों के साथ।
अपने रूठ जाते हैं,
वक्त के साथ।
बचपन बिछड़ा है,
तानों के साथ।
खुद से बिखरे हैं,
है ज़माने का हाथ।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

कहता है मन

कहता है मन,
की कुछ नही सोचूंगा
लेकिन कुछ सोंचे बिना
रहता भी नही।
शुरू करता है पुरानी बातें
तो रुकता भी नही।
हर बार बेहजता है
भावनाओं की दरिया में,
और कहता है बहूँगा नही।
सोंचता है सबके लिए
और कहता किसी से मतलब क्या है।
फिर वही कहता है मन
की सोचूंगा नही।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

दर दर ऐसे भटके

दर दर ऐसे भटके हम
की हर रास्ते से पहचान हो गई।
जब चलते थे रास्ते पे,
हर रास्ते को इंतजार हो गई।
हर रास्ता रुकने को कहता था,
की जरा रुक कर यहीं ठहर जाओ।
कुछ देर ठहरते थे जिस रास्ते पर,
उन रास्तों से ऊबन हो गयी।
फिरसे चल पड़े रास्तों की खोज में,
फिर से शुरू हुई दर दर की ठोकरें।

– मनीषा कुमारी

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Musings

पत्थर भी रो पड़ा

पत्थर भी रो पड़ा,
ये पत्थर सी दुनिया देख।
ये इंसान पत्थर हो गया,
अपना जहां देख।
जिंदगी से हार गया,
हल्की सी धुंध देख।
दिल टूट गया,
सपना टूट देख।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

लिखते चलूं पन्ने पर…

लिखते चलूं पन्ने पर,
जीवन का सार।
कोई मिले राही,
तो सुनता चले बात।
बंद करूँ आँखें,
तो दिखे जीवन का सार।
खुली आँखों पे तो,
धुँधला सा प्रसार।
आओ कभी जीवन में,
एक लेख समझाऊँ।
आज कल कोई,
नई बात बताऊँ।
लिखते चलूं पन्ने पर,
जीवन का सार।
कोई मिले राही,
तो सुनता चले बात।

– मनीषा कुमारी

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comedy Musings

मच्छर

जाहाँ जाहाँ जाऊँ,
वहाँ वहाँ आये।
कोई उससे बात न करे,
फिर भी वो खून पी जाए।
अपनों से ज्यादा अब,
वही साथ निभाये।
बस बदले में थोड़ा सा,
खून पी जाए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

खुद से उलझ पड़े

धीमी है दिल की धड़कन,
धीमी है साँसें।
बंद बंद सी आवाज़ है,
पुकारती हर ओर है।
देखती हर मोड़ पे,
रास्ते उलझ चुके।
इन उलझे रास्तों पे हम तो,
कुछ तो सुलझ चुके।
इस उलझन ने तो,
सब कुछ सुलझा दिया।
फिर भी हम तो,
खुद से उलझ पड़े।

– मनीषा कुमारी