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Motivational poetry

हाथों की लकीरें और पत्थर

हाथों की लकीरें और पत्थर,
दोनों को ही बदलना मुश्किल होता है।
लेकिन किसी न किसी दिन,
ये दोनों बदल के ही रेहते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

बातों की डोर

बातों की डोर,
आपस में ही मिल जाती है।
खुद से मिलकर,
खुद ही में उलझ जाती है।
दिल की उलझन,
दिल को बताती है।
की बातों की पतंग,
दिल में ही अटक जाती है।
बातों की डोर,
पतंगों को उलझती है।
पतंगों की डोर,
कभी सम्भल नहीं पाती है।
फिर उलझ के
नए कलाकृति दिखाती हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

चुप्पी

लोगों पर चुप्पी लगती नहीं,
खुद पे लगाए तो जचती नहीं।
खुद की करे तो बेकार हैं
दूसरों की करे तो बेदिमाग है।
अपनी दुनिया में खुद ही बदनाम है
चुप्पी की कहानियाँ ही
बेमिसाल है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

फर्क

फर्क है नज़रिए का,
देखने के नज़रिए का,
सोंचने के नज़रिए का।
मकान हो किराए का,
तो कोई अपना समझता है,
कोई किसी और का।
इस धरती पर रहने का,
ढंग बहुत अलग है,
केहने में और सहने में,
फर्क बहुत अलग है।
हर चीज़ को देखने का,
हर किसीका,
नज़रिया अलग है।
कोई अच्छे को बुरा,
बुरे को अच्छा ठहरा दे,
कोई खुद की रोटी में खुश है
किसी को छीनी हुई रोटी पसंद है।
फर्क है नज़रिए का,
हर बात को परखने का।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

हादसे के पीछे का कारण

हर रोज़ शाम है होती
जैसे हर रोज़ डूबा देता है
कोई सूरज को दूर
ताली कभी
एक हाथ से नहीं बजती
हर हादसे के पीछे छुपा है
कारण घनघोर।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

अपनापन अंधेरे से

अपनापन अपनापन,
अपनेपन की बात क्या करते हो,
कुछ पल की देरी से,
नाराज़ तुम होते हो।
रात तुझे पता है,
बस तू ही वो वक्त है,
जब कुछ लिखना भाता है।
अंधेरे का अपनापन मुझे,
खींच लाता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

Rituals

Our rituals gives us positivity,
To destroy negativity,
And grow relativity.
Religion is not a cavity,
It sends positivity,
To relax everybody,
And to destroy negativity.

– Manisha kumari

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Motivational story

स्नोई के त्याग से बरसता प्यार

समुन्द्र की लेहरें जब उसके सामने आयी पहले तो वो सेहम गया, फिर समुन्द्र के लेहरों को शांत होते देख वो प्यारा सा कुत्ते का बच्चा खुशी से झूम उठा मानो, नई जिंदगी मिल गयी हो। इतने में उसका मालिक सनी वहाँ आ गया। उसका मालिक बहुत ही क्रूर था। हर वक्त वो अपने कुत्ते स्नोई को डाँटता रहता था, कभी – कभी तो वो उसे बहुत मरता – पिटता था।

घर लौटते वक्त अचानक सनी एक गाड़ी के सामने आ गया, इससे पहले सनी कुछ भी समझ पाता उसके कुत्ते ने उसे धक्का दे कर
उसके मालिक की जान बचा ली और खुद शाहिद हो गया।

जब उसके मालिक ने अपने कुत्ते के दिल में अपने मालिक के लिए प्यार देखा और उसके लिए जान देदी तब उसे ऐहसास हुआ कि वो कितना गलत था कि हर किसी को मारना पीटना ही प्यार समझता था। जब कि प्यार में तो त्याग की भावना होती है और वो अपने कुत्ते को कितना मरता पिटता था। ये सब देखने जानने के बाद वो वापस समुन्द्र के उस किनारे के पास चला गया जहाँ उसने अपने कुत्ते को खुश देखा था। और वो उसकी याद में हर दिन आता था और समुन्द्र की लेहरों के देख खुश होता था।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

समुन्द्र की लेहरें

समुन्द्र की लहरें भी कमाल करती हैं,
कभी ऊँचा उठ
सब कुछ बहा ले जाती हैं।
कभी शांति से बहकर,
मधुर आवाज़ बनाती हैं।
मन की तरह
लेहरों का भी भरोसा नहीं,
इन दोनों का ही खुद पर
नियंत्रण नहीं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

ये मन है कि

समय आज कल,
बहुत जल्दी बीत जाता है,
सोंचते – सोंचते न जाने…
कहाँ ये खो जाता है
जाने अनजाने में…
बहुत कुछ कह जाता है,
ये मन है कि,
हर वक्त बोलता ही रहता है।
सुनता किसी की नहीं,
और करता बिना सोंचे समझे है,
कुछ गलत हो जाने पर दोष
इस दिल और दिमाग का लगता है।
फिर भी,
ये मन है कि,
हर वक्त चलता ही रहता है।

– मनीषा कुमारी