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Motivational poetry

नाज़ुक दौर

नाज़ुक दौर तो सबका होता है,
उससे गुज़र सबको
आगे बढ़ना पड़ता है।
कोई आगे बढ़ जाता है,
तो कोई पीछे छूट जाता है।
जाने कोई क्यों,
कुछ चीजों से
उभर ही नहीं पाता है।
कभी हँसता है,
तो कभी रोता है।
कोई तो, दुनिया को
हर नज़र से देखते हैं
कुछ तो एक ही पल में
हार मान जाते हैं।
दुनिया उतनी छोटी नहीं
जितनी जल्दी लोग
हार मानते हैं।
एक बार प्रकृति के बारे में
जानना शुरू करो
देखना हार मानना भूल जाओगे।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

प्रकृति की प्रेम कहानी

प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी – साधी,
लेकिन ये कहानी,
किसी किसी को ही
समझ मे है आती।
कण कण को बटोर कर,
कभी कोई चीज़ बनाती।
कभी पल में ही किसी,
पहाड़ को मिट्टी में है मिलाती।
प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी साधी,
लेकिन ये कहानी
किसी को ही
समझ मे है आती।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

लिखने को शब्द….

लिखने को शब्द कम पड़ते हैं,
लिखने कागज़ कम पड़ते हैं।
सच ये है कि कुछ भी कम नही पड़ता बस, ख्याल कम पड़ते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

जिंदगी का इम्तिहान

जिंदगी इम्तिहान बन गयी,
पल पल की कहानी गढ़ रही,
हर वक्त सवाल पूछ रही,
जवाब में,
अच्छे बुरे का बंधन बना रही।
सवालों के पुलों से गुज़र,
जब जवाब तक पहुँचते हैं,
पहुँचने से पहले ही,
पुल गिरते अपने भारों से,
लगता है जिंदगी,
इम्तिहान नहीं,
कसरत करवा रही।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

हर कहानी के पीछे

हर कहानी के पीछे
एक राज़ है,
अपनी कहानी में,
हम ही नज़रअंदाज़ हैं।
सोने से मन को
पीतल ठहरा दिया,
चांदी सा मन,
अब सोना हो गया।
हर कहानी में हर कोई,
अजूबा हो गया।
केहने को बारिश ,
यहाँ तूफाँ आ गया।
किसी की जिंदगी,
बातों से तय हो गयी।
कुछ को तो,
मगरमच्छ पे तरस आ गया।
पेंगुइन तो यूँ ही बदनाम हो गया,
केहने को कहानी,
यहाँ पूरा चलचित्र बन गया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

कला की नज़र से

कला कला की नज़र से देखना ही सही है जो कला को धंधा मान के चलते हैं और जो लोग अपनी कला के ज्ञान को सीमित रखते हैं उनका आगे बढ़ पाना थोड़ा मुश्किल होता है।

– मनीषा कुमारी

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ख्याल नहीं रहता बातों का

कभी- कभी कुछ बातों का,
ख्याल नहीं रहता।
जिंदगी में कुछ लोगों का,
पता नहीं चलता।
लिखना था,
किसी ओर की कहानी।
गलती से,
खुद की कहानी लिख बैठे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

मज़दूर दिवस

नमन है सभी को,
सब मज़दूरों को,
सब भाईयों को
और सब बहनों को।
उस हर व्येक्ति को,
जो देश के लिए
काम करे।
अपना चैन खोकर,
अपने देश पर मरते हों।
नमन है सबको,
सब मज़दूरों को।

– मनीषा कुमारी

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दूसरों की बातों पे आना….

दूसरों की बातों पे,
आना आसान है।
कभी खुद से
कुछ सोंच के देखो,
कभी खुदसे
किसी के बारे में जान के देखो।
बिना तालाब में डूबे,
तालाब की गहराई का
पता नहीं लगता।
बिना फल खाये,
फल का स्वाद पता नहीं चलता।
यहाँ नेता कैसा है,
वो चुनाव के बाद पता चलता है
और लोग
किसी रेहन सहन के तरीके से ही
किसी का चरित्र भाँपने लगते हैं।

– मनीषा कुमारी

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कभी – कभी हम…

कभी – कभी हम
कुछ बोल के भी,
बोल नहीं पाते।
रोकना है किसी को,
लेकिन रोक नहीं पाते।
बातें बहोत सी है कहने को,
बस कह नही पाते।
रोने के सिवा ,
कभी – कभी कोई चारा नहीं होता।
गुस्सा करने का
कोई फायदा नहीं होता
कुछ बातें भूल के भी भूल नहीं पाते।
जीने को जी लेते हैं,
कहने को कुछ बोल नहीं पाते।

– मनीषा कुमारी