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Motivational poetry

बातों का राज़

कोई कितना भी छुपा के
कुछ बताये की
“हम तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोंचते”
लेकिन चेहरे पे वो बात
और बातों – बातों राज़
निकल ही जाता है।

मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

क्या करें….

क्या करें
बहुत बड़ी बात है,
छोटा सा डर है
लेकिन लगता डर का महल है।
लोगों के लिए
ये छोटी सी बात है।
कैसे बता दें
इस डर का कारण
जब खुद को ही
याद नहीं
इस डर की वजह
बस शुरुआत हुई थी
और अब तक चल रही।
ये सिल सिला ज़रूर,
कभी न कभी तो
खत्म होगा।
बस हिम्मत बहुत
जुटानी पड़ती है।
क्या करें,
बहुत बड़ी बात है।
छोटा सा डर है,
लेकिन लगता डर का महल है।

– मनीषा कुमारी

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प्रेम, मोह, लोभ

प्रेम, मोह, लोभ
हमेशा खुदसे आता है।
न तो किसी के
बुलाने से आता है।
न तो किसी के समझाने से आता है।
जब जो होना होता है,
वो हो जाता है।
कभी जल्दी
कभी देर से होता है।
ये सब हमेशा खुदसे आता है…..

– मनीषा कुमारी

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शब्दों का नियंत्रण ज़रूरी

शब्दों से मिलकर,
कहानी बनाते हैं,
कभी सच्ची
कभी झूटी बनाते हैं।
तुमने देखा होगा कईयों को,
कहानियों से लोग बदलते हैं।
कभी पिघलते हैं,
कभी बनते हैं
कभी बिगड़ते हैं।
कुछ लोग
सिर्फ शब्दों को महत्व देते हैं,
हर शब्द में लोग
बात ढूंढ लेते हैं
बात को फिर तोड़ मरोड़ देते हैं,
इन सब पर नियंत्रण रखना है
तो शब्दों पर नियंत्रण ज़रूरी है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

हँसी कमाल चीज़ है….

हँसी भी कमाल की चीज़ है,
किसी के सामने
बेमतलब मुस्कुरा के देखो ज़रा
वो इंसान सोंच में चला जाता है
नहीं चाहता कुछ
फिर भी किसी से
हाल चाल पूछ जाता है।
बेमतलब का ख्याल करना,
बस उसी वक्त आता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

शुरुआत

शुरुआत हर वक्त अच्छी हो,
ये भी ज़रूरी नहीं,
शुरुआत कोई भी
कैसी भी हो
बस शुरुआत करनी चाहिए।
किसी भी मंजिल के बारे में,
जानने के लिए
सीढ़ी चढ़ना ज़रूरी है
उस मंजिल तक पहुंचना ज़रूरी है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कभी कभी दिल….

कभी कभी दिल,
कितना बेचैन सा लगता है।
मन है जी भर के रोने का,
लेकिन रोना मुश्किल है।
कहना बहुत कुछ होता है,
लेकिन पता ही नहीं कैसे बोलू।
लेकिन जो होता है,
अच्छे के लिए ही होता है।
जाना तो किसी न किसी दिन है,
बस यही सोंच के
कुछ भी करती हूँ।
कभी – कभी अपने भावनाओं को,
बता ही नहीं पाती।
कुछ चीजें नियंत्रण में ही नहीं होती।
फिर सम्भालने की कोशिश पूरी करती हूँ।

– मनीषा कुमारी

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microtale Motivational poetry

भूरा रंग बुरा बनता जा रहा…

नहीं है कुछ किसी के पास तो भी
कितना बोलते हैं।
जान पहचान है नहीं
बोलने को बोलते है
शादियों में जिंदगी से बड़ी
सुपारी और पैसे हो गए।
खुद भले काले रंगों से रंगे हो,
लेकिन दूसरों में सफेदी चाहिए।
दुनिया भूरी और लोग भूरे हैं
बस फर्क इतना हो गया
लोग भूरे के साथ साथ बुरे भी हो गए।

– मनीषा कुमारी

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काँटों के बगान

काँटें भी शान है, बगीचों के
काँटों के कारण ही,
नहीं बनती फूलों की जिंदगी वीरान।
आती है बहार तो,
महकाती है हर एक बाग।
लेकिन थोड़ी सी ज़रूरत के लिए,
लोग उजाड़ देते हैं,
पूरा एक बगान।
उनके लिए सबक है,
और फूलों के लिए रक्षक है,
ये काँटों के बगान।

– मनीषा कुमारी

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प्रकृति की ताकत

क्या करे परेशान हम भी है,
कभी दिन की दूप,
और कभी बरसात की ठंडी सताती है।
ठंडी में गर्मी के आने का,
और गर्मी में ठंडी का इंतजार हो रहा।
दोनो मौसम के साथ मे होने से
हम परेशान तो बहुत हैं,
लेकिन ऐसा होना भी ज़रूरी है
नही तो प्रकृति की ताकत को,
कोई नहीं समझ सकता।

– मनीषा कुमारी