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Motivational poetry

ज़िद

ज़िद कभी खुशी नही देती,
दूसरों पे निर्भर रहने से।
ज़िद कभी पूरी नही होती,
पूरी दुनिया डरती है ज़िद से
दुनिया क्या है,
इंसान खुद डर जाता है,
खुद के ही ज़िद से।
रिश्तों में दरार लाती है,
ये ज़िद।
जिंदगी की मिठास को,
कम करती है ये ज़िद।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

गलतफ़हमी

गलतफ़हमी का क्या दोष,
हम ही बुला लेते हैं उसे।
गलतफ़हमी तो,
गलती से भी आये,
फिर भी सही नही होता
और सही हो तो,
उसे पल में
मानना मुश्किल होता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

जिंदगी की प्लेट में

जिंदगी की प्लेट में,
व्यंजन कई देखें।
कभी खट्टे कभी मीठे देखे
कड़वाहटों से भरे भी,
कई व्यंजन मिले,
लेकिन उन कड़वाहट वाले
व्यंजनों ने,
मजबूती के ही पोषण दिए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

आखरी पन्नों की बातें

कहानी किसी की,
कभी पूरी नही होती।
रह जाती हैं,
कई बातें अधूरी।
बातें किसी की,
पूरी नही होती।
आखरी पन्नों की,
बातें भी कभी – कभी,
दूसरे किताबों से शुरू है होती।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

विचारों की नदियाँ

नदियों की धारा कैसे,
उलट पुलट जाती है।
सालों से एक ही जगह,
चलते चलते जैसे
वो ऊब सी जाती है।
बिल्कुल विचारों सी हैं नदियाँ,
कभी तेज़ कभी धीमी होती हैं।
हर नदी,
विचारों की तरह ही,
बहती रहती है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

फीकापन

फीकापन है सूनापन,
लेकिन सब कुछ
सूना होना भी अच्छा है।
अपने और दूसरों के बारे में
पता तो चलता है।

फीकापन भी अजीब दवा है,
अच्छा तो नहीं लगता,
लेकिन सब कुछ
सही कर देता है।

जिंदगी में फीकापन
खुद से मिलाता है
और खाने में फीकापन
स्वास्थ्य ठीक करता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

अहंकार

अहंकार दुश्मन है सबका
हंसी रोकने का ज़रिया वो है।
खुद से ये कभी मिलने नहीं देता,
एक ही वाक्य को है दोहराता।
मैं हूँ, मैं ही हूँ, बस मैं ही हूँ,
बस इसी की वो रट लगाता।
वो अहंकार ही है,
जिसने कई राक्षशों को मारा
ये खुदसे किसी को मिलने नहीं देता।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational Musings poetry

कुछ बदलता है

हर दिन, हर रात बदलते हैं,
वक्त बदलता है,
मौसम बदलता है,
हर साल के साथ,
हम भी बदल गए।
जैसे जैसे हम बड़े होते गए,
हमारी सोंच भी बदलते गए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

आसान नहीं होता…

दुनिया के घेरे में,
हर सोंच है घिरा हुआ।
दुनिया के जताने से,
दुनिया बदल नही जाती।
किसी के कह देने से,
कोई भटक नहीं जाता।
दुनिया की रीत में,
कोई आये न आये
दुनिया की समझ में
सब आता है।
कौन कहता है,
पत्थर टूटता नहीं,
हथोड़े के एक वार से वो
चकना चूर हो जाता है।
हवाओं का रुख,
कोई बदल नहीं सकता
बदल दिया तो कोई,
उसे रोक नहीं सकता,
तूफानों को मोड़ना,
आसान नहीं होता।
कभी खुद मैदान में
उतर के देखो
सच्चाई के लिए लड़ना,
आसान नही होता।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

कभी फूलों को देखा…

कभी फूलों को देखा है,
खिलता हुआ?
फिर भी खिल जाता है।
बस वैसे ही मेहनत करोगे
तो ही सफल होगे
क्यूँकि दुनिया,
तुम्हारी मेहनत नहीं
सफलता देखेगी।

– मनीषा कुमारी