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Motivational poetry

शुरुआत

शुरुआत हर वक्त अच्छी हो,
ये भी ज़रूरी नहीं,
शुरुआत कोई भी
कैसी भी हो
बस शुरुआत करनी चाहिए।
किसी भी मंजिल के बारे में,
जानने के लिए
सीढ़ी चढ़ना ज़रूरी है
उस मंजिल तक पहुंचना ज़रूरी है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

कभी कभी दिल….

कभी कभी दिल,
कितना बेचैन सा लगता है।
मन है जी भर के रोने का,
लेकिन रोना मुश्किल है।
कहना बहुत कुछ होता है,
लेकिन पता ही नहीं कैसे बोलू।
लेकिन जो होता है,
अच्छे के लिए ही होता है।
जाना तो किसी न किसी दिन है,
बस यही सोंच के
कुछ भी करती हूँ।
कभी – कभी अपने भावनाओं को,
बता ही नहीं पाती।
कुछ चीजें नियंत्रण में ही नहीं होती।
फिर सम्भालने की कोशिश पूरी करती हूँ।

– मनीषा कुमारी

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microtale Motivational poetry

भूरा रंग बुरा बनता जा रहा…

नहीं है कुछ किसी के पास तो भी
कितना बोलते हैं।
जान पहचान है नहीं
बोलने को बोलते है
शादियों में जिंदगी से बड़ी
सुपारी और पैसे हो गए।
खुद भले काले रंगों से रंगे हो,
लेकिन दूसरों में सफेदी चाहिए।
दुनिया भूरी और लोग भूरे हैं
बस फर्क इतना हो गया
लोग भूरे के साथ साथ बुरे भी हो गए।

– मनीषा कुमारी

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काँटों के बगान

काँटें भी शान है, बगीचों के
काँटों के कारण ही,
नहीं बनती फूलों की जिंदगी वीरान।
आती है बहार तो,
महकाती है हर एक बाग।
लेकिन थोड़ी सी ज़रूरत के लिए,
लोग उजाड़ देते हैं,
पूरा एक बगान।
उनके लिए सबक है,
और फूलों के लिए रक्षक है,
ये काँटों के बगान।

– मनीषा कुमारी

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प्रकृति की ताकत

क्या करे परेशान हम भी है,
कभी दिन की दूप,
और कभी बरसात की ठंडी सताती है।
ठंडी में गर्मी के आने का,
और गर्मी में ठंडी का इंतजार हो रहा।
दोनो मौसम के साथ मे होने से
हम परेशान तो बहुत हैं,
लेकिन ऐसा होना भी ज़रूरी है
नही तो प्रकृति की ताकत को,
कोई नहीं समझ सकता।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

हम कामचोर नहीं….

करना बहुत कुछ है,
बस मन नहीं करता।
वक्त तो बहुत है,
लेकिन कुछ समझ नहीं आता।
तुम हम पर दोष लगाते हो,
लेकिन कभी तुमने भी तो,
कभी हमारे कर्म को नहीं देखा।
हमने जो भी किया,
तुमने कभी ध्यान नहीं दिया।
मेहनत रख दी तुम्हारे सामने,
और तुमने हमेशा नज़र अंदाज़ किया।
सही को तुमने जब गलत कहा,
हमने वो भी मान लिया।
हम आलसी नहीं,
बस खुद से ही नाराज़ हैं।
कामचोर नहीं हम तो
खुद में परेशान हैं।

– मनीषा कुमारी

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नाज़ुक दौर

नाज़ुक दौर तो सबका होता है,
उससे गुज़र सबको
आगे बढ़ना पड़ता है।
कोई आगे बढ़ जाता है,
तो कोई पीछे छूट जाता है।
जाने कोई क्यों,
कुछ चीजों से
उभर ही नहीं पाता है।
कभी हँसता है,
तो कभी रोता है।
कोई तो, दुनिया को
हर नज़र से देखते हैं
कुछ तो एक ही पल में
हार मान जाते हैं।
दुनिया उतनी छोटी नहीं
जितनी जल्दी लोग
हार मानते हैं।
एक बार प्रकृति के बारे में
जानना शुरू करो
देखना हार मानना भूल जाओगे।

– मनीषा कुमारी

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गहने कभी…..

गहने कभी
किसी की अच्छाई या बुराई नही दिखाते
किसी की अच्छाई या बुराई तो
उसके विचार बताते हैं
अगर गहने ही अच्छे बुरे का भेद बता देते
तो कभी रंग, जाती, धर्म में
भेद नही करते
सिर्फ गहनों देख कर ही
किसी के गुण बता देते।

– मनीषा कुमारी

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खर्च करना आसान है

खर्च करना आसान है
किसी और के पैसे खर्च करना आसान है,
माँ बाप के पैसों पर ऐश करना आसान है।
लेकिन जब खुद कमाने लगोगे,
तभी बनती तुम्हारी पहचान है।
तब तुम एक एक पैसे का मोल समझ पाओगे,
आओगे जाओगे कहीं तभी,
रास्तों को समझ पाओगे,
नहीं तो जहाँ हो बस वहीं रह जाओगे।


– मनीषा कुमारी

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समझ आयी झटका लगने पर

हर वक्त चलते विचार हैं,
अपनी कोशिश को छोड़,
अपनी मंजिल को छोड़,
चल पड़े थे झुग्नु कि तरह
बिजली की ताड़ पर।
झटका लगने पर ही समझ आया कि,
कबका छोड़ चले मंजिल को,
किसी और की तलाश में।
मेहनत की नदियाँ छोड़
चल पड़े था,
आकर्षण की चिकनी मिट्टी पहनने
अहसास तो था कि कुछ गलत है
लेकिन झटका लगने पर समझ आया
की आकर्षण की चिकनी मिट्टी तो
मेहनत की नदियों से बनी हैं।

– मनीषा कुमारी