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Motivational Musings poetry

गंभीरता चली गयी…

झूटी दुनिया की,
झूटी बातें,
चुभती तो बहोत है,
लेकिन सच है,
की अब आदत सी है।
आज कल हम बातों को,
गंभीरता से लेते नही।

– मनीषा कुमारी

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Dairy microtale Motivational Musings poetry

लोगों की बातें, लोगों की सोंच…

शायद सच नही मेरा सच,
लेकिन कहने में कैसा खर्च।
लोगों की बातें,
लोगों की सोंच।
हम कुछ भी कहे,
उनको गलत ही है सोंचना।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

लेखक की नज़र

लेखक की नजर से देखो,

तो कलम भी एक दोस्त नज़र आती है।

वरना दुनिया की नजर से तो,

पत्थर भी इंसान नज़र आते हैं।

      – मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

गलती कर बैठे हो

गलती कर बैठे हो,
तो उसे सुधारना सीखो।
गलतियों  में बांध के खुद को,
यूँ न को घसीटो।
गलती कर बैठे हो,
तो उसे सुधारना सीखो।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

जीवन के दौड़ में…

पाना खोना चलता रहेगा,
जीना मरना चलता रहेगा।
जीवन के इस दौड़ में,
मिलना बिछड़ना चलता रहेगा।
देखा कई खाब हमने,
सबको अब सँवारना पड़ेगा।
सब कुछ तो किया हमने,
बस थोड़ा और करना पड़ेगा।
जीवन के इस दौड़ में,
मिलना बिछड़ना चलता रहेगा।

– मनीषा कुमारी

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microtale Motivational story

Book review of ” A boy who can’t swim”

Author – RAVISH T. RAM

Price – 49₹

This book is based on love, career and suicide. In simple word we can say that this book is dedicated to lovers who have very bright life but suddenly they fell in love with a girl. But they can’t get success in love. In this book author started the story very well where three boys want to suicide. And author stop him then ask him about there suicide reason. He perfectly write and narrate the story like we are seeing that story in front of us.

This book is full of inspiring thoughts which can definitely change your life. Author said that every one have problems but we have to face it and become successful person.

So to read this book which have golden word’s then click to this link below :- https://www.amazon.in/gp/product/B08TWXPMR9/ref=as_li_tl?ie=UTF8&camp=3638&creative=24630&creativeASIN=B08TWXPMR9&linkCode=as2&tag=manisha0c2-21&linkId=45f59f791bdef955118cb3e85622388a

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Motivational poetry

बड़ी छोटी सोंच

बड़े बड़े सपने,
छोटी छोटी सोंच।
लोग कहते हैं,
कुछ बड़ा करेंगे।
लेकिन छोटी सी शुरुआत से ही
पल भर में घबरा जाते हैं।
दुनिया देखने चलते हैं,
लेकिन दुनिया के नियम इनको खलते हैं
बड़े बड़े सपने इनके
छोटी छोटी सोंच है।

– मनीषा कुमारी

छोटी थी बड़ी प्यारी, पापा की राज दुलारी। माँ बाप ने प्यार से उसको सरस्वती का नाम दिया, की बेटी हमारी पढ़ कर नाम हमारा बड़ा करेगी। लेकिन बचपन से पढ़ना पसंद न था उसको। थोड़ा पढ़कर थक जाती है अब भी। पढ़ाई में सिर्फ रट रट कर ही आगे बढ़ती फिर आगे ही बढ़ती जाती। इतना कुछ उसको याद न रहता रट कर ही काम चलाती थी। 12 वीं कला के बोर्ड की परीक्षा देते वक्त लगती है एक ही रट की विज्ञान उसे बड़ा पसंद है। लेकिन 10 वीं तक भी उसने विज्ञान कभी न ध्यान दिया। मुश्किल से ही परीक्षा दी होगी। लेकिन छोटे मामा उसके निराले थे खुद शिक्षक होकर भी, छोटी को यही सिखलाते थे। कि बेटा परीक्षा देने का मन न करे तो पैसे खिलवाकर पास करा देंगे, तू चिंता मत कर हम तेरा हर घड़ी साथ देंगे। इसमें छोटी की गलती नही समाज भ्रष्टाचार में डूबा।

छोटी के मुँह से सुनी बात को कविताओं में निखारा है। क्यों कि आज कल भी कई छोटी और उसके भ्रष्ट मामा घूम रहे हैं।

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Musings poetry

ऐ सुबह शाम के सूरज…

सुबह शाम का सूरज देखे,
बीत गए दिन कई।
कोहरे से ही सुबह है होती,
कोहरे में ही शाम है बीतती।
हर एक पौधा,
हर एम फूल,
है तेरे किरणों के इंतजार में
हर इंसान तुझे पुकार रहा,
की ऐ सुबह शाम के सूरज
कभी तो अपनी तेज़ किरणों से
इन कोहरे चादर को भगा।
डूब गया है चेहरा सबका,
जैसे गुम हुआ खुशियों का झोला।
तेरे आने से चमकती है धरती,
तेरे बिन हुआ दिन में अंधेरा।
ऐ सुबह शाम के सूरज,
जल्दी ला खुशियों का मेला।

– मनीषा कुमारी