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किश्तें जिंदगी की

जिंदगी बहुत कीमती है, हर वक्त हर कोई बस जीने के लिए कार्य करता है। हर कोई बस इसी कोशिश में लगा रहता है कि वो अपने जीवन को और बेहतर कैसे कर सकता है। जैसा कि आप विषय में देख सकते हैं यहाँ पर कुछ किश्तों की बात की गई है।
यहाँ पर किश्तों से मतलब बैंकों की किश्त नहीं है बल्कि जिंदगी के किश्तों से है। यानी समय समय पर जो समस्याएँ आती है वो जिंदगी की किश्त ही तो है। जिसे हमें समय समय पर हल करनी यानी चुकानी पड़ती है। जिंदगी बिना समस्याओं की तो होती ही नही। हर समय कोई न कोई समस्या हमे घेरे रहती है। और जो इन समस्याओं को हल कर के वे सकारात्मक सोंच से समस्याओं को तोड़ देता है। वो ही सही मायने में जिंदगी की किश्त भर पाता है।
जो इन किश्तों को समय समय पर भर पता है बस वही सुखी रह पाता है। इसिलए बैंकों के किश्तों भरना न भरना आपकी मर्जी है। लेकिन किश्तों में जिंदगी गुजारना जरूरी है।
इसका मतलब ये नही की आप परेशानियों से घिरे रहे। इसका मतलब है अपने आप जो समस्याएँ आती हैं उसे हल करना है।

– मनीषा कुमारी

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तुम्हारी आँखें तो नहीं बोलती…

तुम्हारी आँखें तो नहीं बोलती,
मगर भाई,
ये दिल सब कुछ जनता है।
तुम्हारा सुख दुख,
सब भाँप लेता है।
तुम्हारे बोलने से पहले,
हमे सब कुछ पता चल जाता है।

– मनीषा कुमारी

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तपती दुपहरी

तपती दुपहरी में लोग,
तरसते बहुत हैं।
आने जाने में लोग,
हिचकिचाते बहुत हैं।
इस दुपहरी में,
लोग चकराते बहुत हैं।
जिसे हुआ जुखाम,
वे राहत पाते हैं।
इस तपती दुपहरी को,
वे दुआ देते बहुत हैं।

– मनीषा कुमारी

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छोटी सी बात पे इंसान….

कभी – कभी,
छोटी – छोटी दिक्कतें भी,
बड़ी – बड़ी तकलीफें बन जाती है।
छोटे से जुखाम में इंसान,
कितना बेचैन हो जाता है।
हर दर्द का इलाज पता हो,
तब भी कितना तड़पता है।
छोटी – छोटी दिक्कतों में भी,
बड़ी – बड़ी तकलीफें ढूंढ लेता है।
छोटी सी बात पे इंसान,
कितना बेचैन हो जाता है।

– मनीषा कुमारी

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बस दिल ही जानता है

बस दिल ही जानता है,
दिल की बातें।
लोग क्या समझे,
किसी के दिल की बातें,
रोने की आहटें,
चुप रहने की घबराहटें,
दिल की भोली बातें।
बस दिल ही जानता है,
दिल की बातें।

– मनीषा कुमारी

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पतंग सी जिंदगी

माना शब्दों को हम
सम्भाल न पाए,
तो हम बेकार हो गये।
माना जिंदगी के साथ
हम चल न पाए,
बेकार हो गए।
कहने वाले तो,
बिन डोर के पतंग उड़ाते हैं,
पतंग सी जिंदगी,
कहाँ उड़ जाती है
कुछ पता ही नही चलता।

– मनीषा कुमारी

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जिंदगी धुँआ है…

जिंदगी धूँआ है,
और लोग आँख मलते हैं।
खुद बीमारी फैलाते हैं,
खुद को शिकार कहते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

रिश्तों की होड़

देखो कैसा ये रिश्तों का डोर,
लड़के वाले
और लड़की वालों के बीच,
कैसी ये होड़।
इतनी तो न होती,
कभी घोड़ों दौड़।
इनकी तुलना में है,
आम जैसे फल।
प्रकार जिसके कई हैं,
स्वाद भी अलग – अलग।
कभी संस्कारी कभी मॉडर्न का छिलका,
कभी मांगो में गाँव वाली चाहिए,
कभी शहर की कोई लड़की चाहिए,
नही तो सिर्फ घरवाली चाहिए।
सच में अनोखी है,
ये रिश्तों की होड़।

– मनीषा कुमारी

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घाव वाली ऊँगली

घाव वाली ऊँगली से,
लिखा बहोत है।
कलम से सिहाई को,
बहाया बहोत है।
लेकिन जिंदगी की दास्ताँ,
लिखनी बहोत है।

– मनीषा कुमारी

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बेहते – बेहते

भावनाओं में बेहते – बेहते,

कहीं बह ही न जाएँ।

कहीं शर्माते – शर्माते,

ढ़ह ही न जाएँ।

अब कोशिश है कि,

चालाक नहीं तो

न सही,

कम से कम

ध्यान वाले तो बन जाएँ।

– मनीषा कुमारी