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Motivational poetry

सब्र टूटते देर नही….

सब्र टूटते देर नही,
लोगों को टूटते देर नही,
खुदसे रूठते देर नही।
हर बात की जल्दी है,
हर काम की जल्दी है,
रुकने के वजह हज़ार,
लेकिन दुनिया से बिखरते
देर नही लगती।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

नाटक जारी है

नाटक जारी है,
कलाकार भी भारी हैं।
इस नाटक के दौर में,
सब एक कहानी है,
कुछ पूरी हैं कुछ बाकी है।
किरदार चाहे कई मिले,
पर हल्की सी चोट से,
हर कलाकार का
किरदार खराब जाता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

कहने सुनाने की बातें बहोत थीं…

कहने सुनाने की,
बातें बहोत थीं।
लोगों ने जो सुनाई,
वो रातें बहोत थीं।
न थी अधूरी,
कोई भी कहानी।
जानें कि बातें,
जाने के रास्ते,
अलग – अलग थे।
कुछ साथ,
कुछ अलग थे।
फिर भी न पा पाय,
उस रास्ते को।
क्योंकि हमारी मंजिल के रास्ते,
अलग – अलग थे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

खुद को न बदला…

सालों की गिनती,
बढ़ती चली गई।
जिंदगी की कहानी,
चलती चली गई।
लोग नए जुड़ते चले गए,
नए कदम बढ़ते चले गए।
कहानियाँ किसी की,
अधूरी रही।
किसी की पूरी,
होती चली गई।
दिन, महीने, साल बदले
अगर तू न बदला,
तो सब बेकार गया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

एक ही पल में…

एक ही पल में,
कहाँ से कहाँ पहोंच जाते हैं।
कभी कहीं चल पड़ते हैं,
तो कभी अटक जाते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

खुद थोड़ा आजमा के देखो

कुछ चीज़ें बनाई नही जाती,
बन जाया करती है।
बागों में फूल भी,
खुद ही खिल जाया करते हैं।
बातों के दल दल में क्या फसते हो,
खुद को थोड़ा आजमा के तो देखो।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Musings

तू है शाम मेरी

तू है शाम मेरी,
तू है रात मेरी,
तू जग का सूरज,
तू चाँद मेरी।
तू है बारिश की बूँद नई,
तू कोहरे की पेहली चादर है,
तू ओस की हल्की बूँदे है,
तू मीठा एहसास है,
तू पौधों में खास है।
ये फूलों की बात है,
ये उससे भी खास है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

हार को भी शुक्रिया कहेगा

अनहोनी मुसीबीतें पता नही पूछती,
उनकी तो कोई जुबान नही होती।
दिखा देती है मंजिलों के रास्ते,
तू डट के ज़रा चल तो सही।
यूँ रुक न कहीं,
यूँ थम न कहीं।
कब तक हार से डरेगा,
एक दिन हार भी हारेगा,
तू ही जीतेगा
उन हार को भी शुक्रिया कहेगा।

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Motivational Musings

रोज़ नई खुशियाँ मना लो….

लगे हैं सब ढूढ़ने,
कुछ खुशमिजाजी लोगों को,
यूँ ढूंढ़ते ढूंढ़ते मिले कुछ लोग।
थे उसमे कुछ अच्छे भी,
तो कुछ थे अलग मिज़ाजी भी।
कुछ करते थे बुराई सबकी,
कुछ थे पसंद सबकी।
ये अलग सलीके के खुशमिजाजी,
कुछ को भाते कुछ को नही।
फिर भी लोग ढूंढ रहे,
कुछ खुशमिजाजी लोगों को।
यूँ ढूंढते ढूंढते तुम तंग आजाओगे,
क्यों न खुद ही छोटी छोटी खुशियों का,
एक घर बना लो।
रोज़ कोई त्योहार हो,
रोज़ नई खुशियाँ मना लो।

– मनीषा कुमारी

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Motivational

हिम्मत एक मैदान है

हिम्मत एक मैदान है,
जिस पे तुझे चलना है।
मुश्किल मुश्किल इंतज़ार करे,
हिम्मत दिखा आगे बढ़ना है।
डर न छोटी चोटों से,
तू गिरा अभी तो क्या हुआ
ये सारी तेरी परीक्षा है।
हाँथ पे हाँथ धरे बैठा है,
तू क्यों मायूस बैठा है,
शुरुआत से तू आगे है,
बहोत दूर नही तेरी मंजिल है।
ये हिम्मत एक मैदान है,
जिस पे तुझे चलना है।

– मनीषा कुमारी