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दिवाली का माहौल

दुखों की घड़ी मिटा दो,
हंसी की लड़ी लगा दो।
चारों तरफ फूल खिला दो,
बातों की रंगोली सजा दो।
दिवाली का माहौल बना दो,
दियों की कतार लगा दो।
पटाखों की लड़ी लगा दो,
मिठाइयों की बरसात करा दो।
भगवान की पूजा से,
पूरा घर सजा दो।

– मनीषा कुमारी

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धुँध है चारो तरफ

धुँध है चारो तरफ,
सुनसान है रास्ता।
जाने कहाँ जाएगा,
हर एक रास्ता।
दुनिया की इस भीड़ में,
धुँध बने, सपनों के रास्ते।
हटाना जानते हैं धुँध को लेकिन,
हटाना है मुश्किल।
लेकिन कुछ भी मुश्किल नही,
कुछ दूर चलते ही,
खुद ब खुद दिख जाते हैं
बाकी के रास्ते।

– मनीषा कुमारी

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हृदय की गति

हृदय की गति गीत गाती है,
देखो क्या ये हमे सुनाती है।
ताज़ी हवा की ताज़गी देखो,
नए पत्तों के अरमान देखो।
दिन भर मैं चलते जाऊँ,
तुम भी अपना कार्य देखो।
कार्य संग कसरत देखो,
वक्त के संग चलते जाओ।

– मनीषा कुमारी

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जिंदगी की रंगोली

किस्मत को दोष दूँ,
या अपनो को दोष दूँ,
या वक्त ही खराब है।
कभी खुशी का माहौल है,
कभी दुखों का सागर है,
कभी वक्त की बहार है,
कभी वक्त का साथ है,
कभी आलस का हाँथ है।
दुनिया की भाग दौड़ में,
सब चल रहे शोर में,
फिर भी बूँद बूँद बरस रहे,
मेहनत का पानी है।
दूर तक आये हैं,
तो अंत तक जाएँगे।
जिंदगी की रंगोली को,
कलम से सजायेंगे।

– मनीषा कुमारी

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अच्छे लोग

अच्छे लोगों का लोग
इम्तिहान बहोत लेते हैं।
बुरे लोग तो यूँ ही,
अपनी झूठी मीठी बातों से
बच जाया करते हैं।
फँस जाते हैं वो लोग,
जो चालक नही बन पाते।
बस खुद में फंसे
रह जाते हैं।

– मनीषा कुमारी

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परेशान मन

परेशान मन ठीक वैसा है जैसे,
चौराहे पर खड़ी कई गाड़ियां।
जो लगी लक्ष्य तक पँहुचने में
और सब हैं अपनी जल्दी में।
लेकिन फँसे हैं सब ऐसे
जैसे कई धागे आपस में ही
खुद से उलझे बैठे हैं।
यहाँ सब रास्ते तो
खुद से उलझे बैठे हैं।    

– मनीषा कुमारी

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काम बचा है थोड़ा सा

काम बचा है थोड़ा सा,
जिस काम लिए में जागा था।
चलो अब थोड़ा रुक जाऊं,
जाऊं कहीं ठहर जाऊं।
लेकिन यहाँ अच्छा बहोत लगता है,
चलो कल करेंगे काम,
आज करलेते हैं आराम।

अरे! दूसरा दिन हो आया,
मेरा काम भी बढ़ गया।
अब इसे पूरा करने में,
दिन भर लग जायेगा।
काश कल ही करलिया होता,
फिर न आज ये रोना होता,
आज आराम का मौसम होता।

– मनीषा कुमारी

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मुसीबत

यूँ भागो मत मुसीबत से,
ये मुसीबत भी एक परीक्षा है।
देखो तुमसे कह रही,
दोस्त हूँ मै तेरी।
अगर तूने खुशी से मुझे अपनाया,
तो में रास्ता बन जाऊंगी।
तू मुझे पार कर करके देख,
मैं तेरी मंजिल बंजाऊँगी।

– मनीषा कुमारी

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मन उपवन

मन उपवन में पुष्प खिला है,
खुशियों का ये रंगमंच मिला है।
सूरज की उन किरणों से,
पंखुरी पंखुरी खिल आयी है।
दुनिया देखो चमक उठी
अब सुबह हो आई है।

– मनीषा कुमारी

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चलो आगे बढ़े

अब तो सूरज भी देखो उग गया,
अब तो दिन भी शुरू हो गया।
अब तो दिल के सूरज को जगाओ,
अब तो ताजी हवा में, खुद को मिलाओ।
चलो लक्ष्य की तरफ बढ़े,
चलो आज कुछ नया करे।
कुछ नया सीखे,
चलो आगे बढ़े।

– मनीषा कुमारी

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