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Dairy Motivational poetry

गुणों का नाश

दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती है
इस पल कुछ और
दूसरे ही पल कुछ और
ये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।
कुछ ही पलों में,
जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।
जल्दबाज़ी से गुणों का,
फासला आजाता है।
गुण बनते हैं धीमी आँच पे,
जल्दबाज़ी से तो गुणों का
नाश ही होता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

हर कहानी के पीछे

हर कहानी के पीछे
एक राज़ है,
अपनी कहानी में,
हम ही नज़रअंदाज़ हैं।
सोने से मन को
पीतल ठहरा दिया,
चांदी सा मन,
अब सोना हो गया।
हर कहानी में हर कोई,
अजूबा हो गया।
केहने को बारिश ,
यहाँ तूफाँ आ गया।
किसी की जिंदगी,
बातों से तय हो गयी।
कुछ को तो,
मगरमच्छ पे तरस आ गया।
पेंगुइन तो यूँ ही बदनाम हो गया,
केहने को कहानी,
यहाँ पूरा चलचित्र बन गया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

जिंदगी की रफ्तार

जिंदगी की रफ्तार कुछ धीमी हो गयी,
मंदी के दौर में घरबन्दी हो गयी।
मई के महीने में भी,
यहाँ ठंडी हो गयी।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

दिल से आवाज़ निकली

खुद के दिल से जो आवाज़ निकली,
बस वही जरूरी बात निकली।
कभी किसी के बातों को समझ कर भी,
हमसे कोई बात न निकली।
खुद के दिल से जो बात निकली,
बस वही बात खास निकली।
हर एक राज़ की बात में से,
निन्यानवे प्रतिशत अफवाह निकली।
खुद के दिल से जो आवाज़ निकली,
बस वही बात खास निकली।

– मनीषा कुमारी

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comedy Motivational story

चलो कल भागते हैं

एक लड़की घर बैठे – बैठे बहोत परेशान रहती थी । वो बहोत दिनों से भागने के बारे में सोंचती रहती थी। फिर एक दिन अचानक उसे ख्याल आया कि आज भाग ही जाती हूँ इसलिए वो इसके लिए तैयारी करने लगी। लेकिन ऐसे करते करते उसे कई साल बीत गए क्योंकि तभी एक मुसीबत आ गयी। की उसे समझ नही आ रहा था कि वो भागे कहाँ इसलिए वो हर बार यही सोंच सोंच कर भागना टाल देती थी। और जब उसने निश्चेय कर ही लिया कि अब वो भाग कर रहेगी, तो फिर एक परेशानी ने उसे घेर लिया जिसके लिए उसे फिर एक साल लगे और वो परेशानी काफी गंभीर थी, कि उसका कोई साथी नही है जिसके साथ वो भागे। इसलिए उसने एक दिन निश्चय किया कि अब अकेले ही भागने जाया करेगी। क्यों कि सुबह – सुबह भागना सेहत के लिए अच्छा होता है।

– मनीषा कुमारी

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Musings

बुरे क्यों न लगे

कहतें है बुरे हो तुम
और बुरी है तुम्हारी बातें,
और क्यों न हों,
जब भला किसी का कर दिया,
तो बुरे क्यों न लगे।

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Musings

खेल खेल के दुनिया सारी

खेल खेल के दुनिया सारी,
खेल में ही चली जाती है।
न देखती दाँए बाएँ,
न देखती आगे पीछे।
खुद के मन से रुक जाया करती हैं,
कभी खुद ही चल जाया करती है।
कभी ये रुलाती है, कभी ये सताती है,
कभी साथ दे जाती है।
लाते लाते रंग कई,
रंगोली सी बिखर जाती है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

क्या बदलना बुरा है?

वक्त बदले सब बदले,
हम बदले तुम बदले।
देखो ये किताबें भी बदली,
हाँथों की लकीरें भी बदली।
देखते देखते किस्मत भी बदली,
और तुम कहते हो बदलना बुरा है!

– मनीषा कुमारी

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Motivational

कुछ सीखना है बाकी

जिंदगी में कोई खाब पूरा करना है,
दुनिया चाहे भूल जाये,
लेकिन कुछ करना है बाकी।
कैसे रोक दु अपने जीवन के ज्ञान को,
अभी और कुछ भी सीखना है बाकी।

– मनीषा कुमारी

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comedy Musings

मच्छर

जाहाँ जाहाँ जाऊँ,
वहाँ वहाँ आये।
कोई उससे बात न करे,
फिर भी वो खून पी जाए।
अपनों से ज्यादा अब,
वही साथ निभाये।
बस बदले में थोड़ा सा,
खून पी जाए।

– मनीषा कुमारी