Categories
Motivational poetry

समझ आयी झटका लगने पर

हर वक्त चलते विचार हैं,
अपनी कोशिश को छोड़,
अपनी मंजिल को छोड़,
चल पड़े थे झुग्नु कि तरह
बिजली की ताड़ पर।
झटका लगने पर ही समझ आया कि,
कबका छोड़ चले मंजिल को,
किसी और की तलाश में।
मेहनत की नदियाँ छोड़
चल पड़े था,
आकर्षण की चिकनी मिट्टी पहनने
अहसास तो था कि कुछ गलत है
लेकिन झटका लगने पर समझ आया
की आकर्षण की चिकनी मिट्टी तो
मेहनत की नदियों से बनी हैं।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

राजनीति की भाषा

राजनीति की भाषा समझना मुश्किल है,
उसे समझाना मुश्किल है।
आज कल तो,
गली गली राजनीति चल पड़ी।
हर जगह राजनीति का,
दौर दिखता है।
ये राजनीति की भाषा
किसी किसी को ही समझ आ रही।
जिसको समझ आ रही,
वो राजनीति में चला जाता है
कोई अच्छा तो कोई बुरा बन जाता है,
राजनीति की भाषा को
सरल बनाना होगा।
हर नागरिक तक आवाज़ पहुँचे,
ऐसा कुछ कर दिखाना होगा।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

आवाज़ की गलियाँ

आवाजों की गलियों को खोलो
कहीं, आवाज़ न बैठ जाए।
आवाजों की गलतियाँ क्या निकलते हो,
ज़रा आवाजों को गुनगुनाएँ
आवाजों की गलियों को अपनाएँ,
ज़रा आवाजों को आजमाएँ
इसमें से तो,
अच्छे सुर भी है निकलते,
आप ज़रा अच्छा बोल कर दिखाएँ,
आवाज़ का दोष न लगाएँ,
आवाज़ को कला की तरह गुनगुनाएँ।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

हाथों की लकीरें और पत्थर

हाथों की लकीरें और पत्थर,
दोनों को ही बदलना मुश्किल होता है।
लेकिन किसी न किसी दिन,
ये दोनों बदल के ही रेहते हैं।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

बातों की डोर

बातों की डोर,
आपस में ही मिल जाती है।
खुद से मिलकर,
खुद ही में उलझ जाती है।
दिल की उलझन,
दिल को बताती है।
की बातों की पतंग,
दिल में ही अटक जाती है।
बातों की डोर,
पतंगों को उलझती है।
पतंगों की डोर,
कभी सम्भल नहीं पाती है।
फिर उलझ के
नए कलाकृति दिखाती हैं।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

हादसे के पीछे का कारण

हर रोज़ शाम है होती
जैसे हर रोज़ डूबा देता है
कोई सूरज को दूर
ताली कभी
एक हाथ से नहीं बजती
हर हादसे के पीछे छुपा है
कारण घनघोर।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

Rituals

Our rituals gives us positivity,
To destroy negativity,
And grow relativity.
Religion is not a cavity,
It sends positivity,
To relax everybody,
And to destroy negativity.

– Manisha kumari

Categories
Musings poetry

कुछ नहीं लिखा

कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल बहुत थे।
आसमाँ में बादल,
और यहाँ विचार बहोत थे।
छलक रही थी,
विचारों की नदियाँ,
लेकिन विचार,
आपस में भीड़ रहे थे।
कहने को विचार,
लिखने को, आपस लड़ रहे थे।
कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल, बहुत आ रहे थे।

     – मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

घमंड लोगों का

घमंड लोगों का,
क्या तेज़ बोलता है।
दूसरों झुकने का,
हर मौका त्यार रहता है।
हमसे पहले फोन करवाकर,
वो अपने घमंड का
पहाड़ बनाता है।
सच में बचकाना पन,
कहाँ जा के खत्म होता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Motivational poetry

गरीबी

महँगाई के इस दौर में,
कहीं भुखमरी फेल रही,
तो कहीं इंतज़ार है,
दो वक्त रोटी की।
किसी को इंतज़ार है छत की,
तो कहीं,
अच्छे कपड़े पहनने की लालसा।
महँगाई के कारण,
हर इंसान परेशान है।
बढ़ती गरीबी का,
महँगाई ही राज़ है।

– मनीषा कुमारी