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Motivational

What is WLD?

WLD full form is world literacy day. The day of spreading importance of literacy in whole world it was declared on 26 Oct. 1966 at the 14th session of UNESCO’s general confrence also it was declared by UNESCO. But first time WLD celebrated on 1967. This day have a motive to spread education to every individuals, communities and societies. This day celebrated in most of the countries.


World have millions of population but in every country one in five adults are still not literate and two third of them are women. 60.7million children never seen school because of poverty and other financial imbalance. After all some children are irregular in school or drop out before completing their education.

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Motivational poetry

मोबाईल की खुशबू में…

दौर, ज़माना और बचपन
सब बीत गया
पतझड़ के मौसम में
उस पेड़ से हर एक पत्ता गिर गया…
उस तालाब के
हर किनारे सूख गए..
नब्बे के दशक का बचपन
कभी सुनेहरा,
कभी कुछ काला लिख गया।
मिट्टी की खुशबू में
मिलता फूलों से बचपन,
हँसते – खेलते,
रोते – चलते बीत गया।
मोबाईल की खुशबू में,
बचपन कहीं खो गया।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

गुणों का नाश

दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती है
इस पल कुछ और
दूसरे ही पल कुछ और
ये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।
कुछ ही पलों में,
जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।
जल्दबाज़ी से गुणों का,
फासला आजाता है।
गुण बनते हैं धीमी आँच पे,
जल्दबाज़ी से तो गुणों का नाश।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

छोटी छोटी बातों को

यूँ छोटी छोटी बातों को हम,
क्यों पकड़ा करते है।
हर बात को क्यों खींचा करते हैं,
रोज़ रात को सोंचते हैं
हम सिर्फ सोंचा ही करते हैं।
खुद को संभालना भी,
बहुत मुश्किल काम है।
हम खुद को रोज़ बनाया करते हैं,
रोज़ एक नई सोंच से हम
गुजरा करते हैं।
जाने क्यों हम,
छोटी छोटी बातों को
हम पकड़ा करते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

क्या करें….

क्या करें
बहुत बड़ी बात है,
छोटा सा डर है
लेकिन लगता डर का महल है।
लोगों के लिए
ये छोटी सी बात है।
कैसे बता दें
इस डर का कारण
जब खुद को ही
याद नहीं
इस डर की वजह
बस शुरुआत हुई थी
और अब तक चल रही।
ये सिल सिला ज़रूर,
कभी न कभी तो
खत्म होगा।
बस हिम्मत बहुत
जुटानी पड़ती है।
क्या करें,
बहुत बड़ी बात है।
छोटा सा डर है,
लेकिन लगता डर का महल है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

प्रेम, मोह, लोभ

प्रेम, मोह, लोभ
हमेशा खुदसे आता है।
न तो किसी के
बुलाने से आता है।
न तो किसी के समझाने से आता है।
जब जो होना होता है,
वो हो जाता है।
कभी जल्दी
कभी देर से होता है।
ये सब हमेशा खुदसे आता है…..

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

नाज़ुक दौर

नाज़ुक दौर तो सबका होता है,
उससे गुज़र सबको
आगे बढ़ना पड़ता है।
कोई आगे बढ़ जाता है,
तो कोई पीछे छूट जाता है।
जाने कोई क्यों,
कुछ चीजों से
उभर ही नहीं पाता है।
कभी हँसता है,
तो कभी रोता है।
कोई तो, दुनिया को
हर नज़र से देखते हैं
कुछ तो एक ही पल में
हार मान जाते हैं।
दुनिया उतनी छोटी नहीं
जितनी जल्दी लोग
हार मानते हैं।
एक बार प्रकृति के बारे में
जानना शुरू करो
देखना हार मानना भूल जाओगे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

गहने कभी…..

गहने कभी
किसी की अच्छाई या बुराई नही दिखाते
किसी की अच्छाई या बुराई तो
उसके विचार बताते हैं
अगर गहने ही अच्छे बुरे का भेद बता देते
तो कभी रंग, जाती, धर्म में
भेद नही करते
सिर्फ गहनों देख कर ही
किसी के गुण बता देते।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

समझ आयी झटका लगने पर

हर वक्त चलते विचार हैं,
अपनी कोशिश को छोड़,
अपनी मंजिल को छोड़,
चल पड़े थे झुग्नु कि तरह
बिजली की ताड़ पर।
झटका लगने पर ही समझ आया कि,
कबका छोड़ चले मंजिल को,
किसी और की तलाश में।
मेहनत की नदियाँ छोड़
चल पड़े था,
आकर्षण की चिकनी मिट्टी पहनने
अहसास तो था कि कुछ गलत है
लेकिन झटका लगने पर समझ आया
की आकर्षण की चिकनी मिट्टी तो
मेहनत की नदियों से बनी हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational poetry

राजनीति की भाषा

राजनीति की भाषा समझना मुश्किल है,
उसे समझाना मुश्किल है।
आज कल तो,
गली गली राजनीति चल पड़ी।
हर जगह राजनीति का,
दौर दिखता है।
ये राजनीति की भाषा
किसी किसी को ही समझ आ रही।
जिसको समझ आ रही,
वो राजनीति में चला जाता है
कोई अच्छा तो कोई बुरा बन जाता है,
राजनीति की भाषा को
सरल बनाना होगा।
हर नागरिक तक आवाज़ पहुँचे,
ऐसा कुछ कर दिखाना होगा।

– मनीषा कुमारी