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Dairy Motivational poetry

गुणों का नाश

दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती है
इस पल कुछ और
दूसरे ही पल कुछ और
ये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।
कुछ ही पलों में,
जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।
जल्दबाज़ी से गुणों का,
फासला आजाता है।
गुण बनते हैं धीमी आँच पे,
जल्दबाज़ी से तो गुणों का नाश।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

दिल का परिंदा

परिंदों सा दिल
गया है मिल
जा कर कहीं, फूलों में खिल।

देखने को मुड़ा कोई,
कहानी बनी नई,
दिल में हल चल हुई कोई नई

जा कर देखा, है किताबों की लड़ी,
दिल में एक खुशी सी उमड़ी,
सारी खुशियाँ हो जैसे, उसी में जड़ी।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

काँटों की तरह (शायरी)

काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते
दूसरों के साथ – साथ
खुद को भी चुभने लगे हैं।
बात छोटी सी होती है
और पूरे मोहल्ले को सर पे उठाने लगे हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

काँटों की तरह….

काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते,
दूसरों के साथ – साथ,
खुद को भी चुभने लगे हैं।
छोटी छोटी बातों पे,
बहस होने लगे हैं।
गलती खुद की होती है,
और दोष सब पे लगने लगे हैं।
समझदार होकर भी,
हम ना समझ हो गए हैं।
सच में,
काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते।
दूसरों के साथ – साथ,
खुद को भी चुभने लगे हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

व्हाट्सएप

व्हाट्सएप ने क्या खेल है खेला,
किसी को पास लाया,
किसी को जुदा किया।
कभी अपना समझा,
कभी पराया।
कभी हमे खुशियाँ दी है,
कभी हमे रुलाया।
व्हाट्सएप ने दुनिया को,
पास के साथ साथ,
दूर भी है बुलाया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

बातों की समझ

हर बात जानें क्यों,
आखिर में समझ में आती है।
जिस बात में दम नही,
सबसे पहले वो समझ आती है।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational poetry

दोस्ती कोई बंधन नही

दोस्ती कोई बंधन नही,
दो अलग भावनाओं का संगम है।
अरे वो दोस्ती क्या करेगा,
जो ढंग देख कर रंग बदलते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

दिल का दर्द

दिल का दर्द,
और शब्दों का अर्थ,
हर कोई नही समझ पाता।
लोग कहते हैं,
जीना आसान है बहोत,
फिर भी कोई कर नही पाता।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

कलम की पुकार

कुछ कहना, लिखना,
सिर्फ क्रिया नही,
भावनाएँ हैं दिल की।
बात से बात की,
जुड़ती है पहेली।
हर दिन हर पल,
एक बात है कहती।
मुझे लिखो मुझे सुनाओ,
मुझे भावनाओं में गढ़ते जाओ।
बार बार ये पुकार के कहती,
जानती नही में सारी बातें,
फिर भी कुछ कहना हूँ चाहती।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

जानना तो हर कुछ था…

जनना तो हर कुछ था,
जाना भी बहोत कुछ था।
कई मंजिलों को टटोला था,
फिर भी हमे हर मंजिल से दूर होना था।
बातों की सेर में फंस कर,
यूँ हमे रोना था।
किसी को दोष दिये बिना ही,
हमे आगे बढ़ना था।
पास आकर भी हमे,
हर कुछ भूलना था।

– मनीषा कुमारी