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Motivational Musings poetry

सपने बड़े रखते हैं…

सपने बहोत बड़े रखते हैं,
पूरा करने से हम डरते हैं।
बात बात पे घबराहट है,
फिर भी इस दिल पे लानत है,
मेहनत से ही घबराहट है।
एक छोटी सी चोट से,
हर दिन ये रोता है।
बात छोटी सी होती है,
और खुद को घायल कहता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

काँटों की तरह (शायरी)

काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते
दूसरों के साथ – साथ
खुद को भी चुभने लगे हैं।
बात छोटी सी होती है
और पूरे मोहल्ले को सर पे उठाने लगे हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

काँटों की तरह….

काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते,
दूसरों के साथ – साथ,
खुद को भी चुभने लगे हैं।
छोटी छोटी बातों पे,
बहस होने लगे हैं।
गलती खुद की होती है,
और दोष सब पे लगने लगे हैं।
समझदार होकर भी,
हम ना समझ हो गए हैं।
सच में,
काँटों की तरह हो गए हैं रिश्ते।
दूसरों के साथ – साथ,
खुद को भी चुभने लगे हैं।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

दिल ने बहुत कुछ झेला है

दिल इतना भी कमज़ोर नहीं,
कि कोई मेरे जख्म को कुरेद दे।
बस कभी कभी दिल कोमल सा हो जाता है,
वरना दिल बहुत कुछ झेला है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

किताब हो तो ऐसी

किताब हो तो ऐसी,
जिस में कोई बात हो,
हर पन्ने पे राज़ हो,
बातों की लड़ी लगी हो,
और हर शब्द खास हो।
गत्ते भी कहानी बोले,
खुशबू भी राज़ खोले,
किरदार भले हो भोले,
परन्तु लगे जैसे कोई सामने से बोले।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

पंखुरी उखाड़ कर

पंखुड़ी उखाड़ कर फूलों से कहतें हैं,
अब तुम सूंदर नही दिखती।
इतनी ही नफरत थी,
तो फूल को जिंदगी में लाये ही क्यों थे।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

व्हाट्सएप

व्हाट्सएप ने क्या खेल है खेला,
किसी को पास लाया,
किसी को जुदा किया।
कभी अपना समझा,
कभी पराया।
कभी हमे खुशियाँ दी है,
कभी हमे रुलाया।
व्हाट्सएप ने दुनिया को,
पास के साथ साथ,
दूर भी है बुलाया।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

बातों की समझ

हर बात जानें क्यों,
आखिर में समझ में आती है।
जिस बात में दम नही,
सबसे पहले वो समझ आती है।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational poetry

दोस्ती कोई बंधन नही

दोस्ती कोई बंधन नही,
दो अलग भावनाओं का संगम है।
अरे वो दोस्ती क्या करेगा,
जो ढंग देख कर रंग बदलते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

दिल का दर्द

दिल का दर्द,
और शब्दों का अर्थ,
हर कोई नही समझ पाता।
लोग कहते हैं,
जीना आसान है बहोत,
फिर भी कोई कर नही पाता।

– मनीषा कुमारी