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Motivational Musings poetry

फीकापन

फीकापन है सूनापन,
लेकिन सब कुछ
सूना होना भी अच्छा है।
अपने और दूसरों के बारे में
पता तो चलता है।

फीकापन भी अजीब दवा है,
अच्छा तो नहीं लगता,
लेकिन सब कुछ
सही कर देता है।

जिंदगी में फीकापन
खुद से मिलाता है
और खाने में फीकापन
स्वास्थ्य ठीक करता है।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Motivational Musings poetry

कुछ बदलता है

हर दिन, हर रात बदलते हैं,
वक्त बदलता है,
मौसम बदलता है,
हर साल के साथ,
हम भी बदल गए।
जैसे जैसे हम बड़े होते गए,
हमारी सोंच भी बदलते गए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

कभी फूलों को देखा…

कभी फूलों को देखा है,
खिलता हुआ?
फिर भी खिल जाता है।
बस वैसे ही मेहनत करोगे
तो ही सफल होगे
क्यूँकि दुनिया,
तुम्हारी मेहनत नहीं
सफलता देखेगी।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

तपती दुपहरी

तपती दुपहरी में लोग,
तरसते बहुत हैं।
आने जाने में लोग,
हिचकिचाते बहुत हैं।
इस दुपहरी में,
लोग चकराते बहुत हैं।
जिसे हुआ जुखाम,
वे राहत पाते हैं।
इस तपती दुपहरी को,
वे दुआ देते बहुत हैं।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

कोई बात नही

जान पहचान की बात नही,
कोई बुरा हो,
तो उसकी औकात नही।
कोई अच्छा हो,
इतना कोई खास नही।
लोगों की बातों से,
किसी की कोई,
पहचान नहीं।
कोई बोले तो ठीक,
हम बोले तो,
कुछ खास नही।
हमारी जिंदगी से,
कोई जान पहचान नही।
जान पहचान की,
कोई बात नही।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

दबे हैं बोझ तले

दबे हैं बोझ तले,
पसंद न पसंद के पीछे।
हर कुछ बोले,
तो गलत है।
न बोले,
तो भी गलत है।
जाने कौनसा मोड़ है वो,
जिस मोड़ पे मिलेगी,
हमारे जिंदगी की पगडंडी।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

रिश्तों की होड़

देखो कैसा ये रिश्तों का डोर,
लड़के वाले
और लड़की वालों के बीच,
कैसी ये होड़।
इतनी तो न होती,
कभी घोड़ों दौड़।
इनकी तुलना में है,
आम जैसे फल।
प्रकार जिसके कई हैं,
स्वाद भी अलग – अलग।
कभी संस्कारी कभी मॉडर्न का छिलका,
कभी मांगो में गाँव वाली चाहिए,
कभी शहर की कोई लड़की चाहिए,
नही तो सिर्फ घरवाली चाहिए।
सच में अनोखी है,
ये रिश्तों की होड़।

– मनीषा कुमारी

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लोग बरसते हैं

लोग बरसते हैं,
बरसने के लिए।
हम गरजते हैं
गरजने के लिए।
लेकिन अब अपनी,
दुनिया ही अलग है।
हम छाँव लाते हैं,
बरसने के लिए,
गरजते सिर्फ तूफानों में हैं।
लोग चाहे बरसते हैं,
बरसने के लिए।

– मनीषा कुमारी

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मूर्ख बनने बनाने का सिलसिला

मूर्खता होती नहीं,
हो जाती है।
कभी फिक्र से,
कभी दिल से,
कभी मन से,
कभी अनजाने में।
मूर्ख बनाने बनने का सिलसिला,
चलता बिगड़ता रहता है।
मूर्ख बनना कोई,
बुरा नहीं।
कभी – कभी मूर्ख बनना तो
खुद के हँसी का,
कारण बनता है।
मूर्ख बनाने बनने का सिलसिला,
बनता बिगड़ता रहता है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

कुछ बाकी है..

लिखना तो कुछ नही
लेकिन लिख कर भी
बहुत कुछ लिखना बाकी है।
कई शब्दों को पढ़ना,
कई किताबों को टटोलना बाकी है
नही है जिंदगी, फिर भी
जीना बाकी है।
हर मुश्किल के बाद भी
परेशान होना बाकी है।
उदास बहुत हैं,
लेकिन खुश होना बाकी है।
जिंदगी की राह में अभी,
बहुत दूर चलना बाकी है।
देखो कहीं,
जिंदगी रो तो नही रही,
अभी बहुत रूठना बाकी है।
जिंदगी की राह में
बहुत दूर चलना बाकी है
न जाने कौनसा गिला है हमें
की हमें गिर कर फिर,
उठना बाकी है।

– मनीषा कुमारी