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Motivational Musings

कभी कभी…

कभी कभी पागलों की तरह,
हँसते रहना भी अच्छा है।
कभी कभी दुख में,
खुश होना भी अच्छा है।
कभी कभी खुशी में भी,
और खुश होना अच्छा है।
कभी कभी दुनिया को भूल कर,
हँसते रहना अच्छा है।
कभी कभी खुद भुला कर,
हँसते रहना अच्छा है।
कभी कभी सिर्फ,
हँसते रहना भी अच्छा है।
दुनिया में दुख के सिवा,
फालतू का हँसना रखा है।
ज़रा ध्यान से देखो दुनिया को,
दुनिया में सिर्फ हँसना रखा है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

दूसरों को गंदा बताएँ हैं…

खुद कीचड़ में डूबें हैं,
दूसरों को गंदा बताएँ हैं।
खुद की गंदगी दिखे नही,
दूसरों की गलती उछाले हैं।
दूसरों का शोर शोर है,
अपना शोर बातें हैं।
दूसरों का नुकसान नुकसान है,
अपना नुकसान बुरा है।
दुनिया तो है ही गोल,
हैं गोल इनकी बातें भी।
खुद कीचड़ में डूबे हैं,
दूसरों को गंदा बताएँ हैं।

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Motivational Musings

धुँध है चारो तरफ

धुँध है चारो तरफ,
सुनसान है रास्ता।
जाने कहाँ जाएगा,
हर एक रास्ता।
दुनिया की इस भीड़ में,
धुँध बने, सपनों के रास्ते।
हटाना जानते हैं धुँध को लेकिन,
हटाना है मुश्किल।
लेकिन कुछ भी मुश्किल नही,
कुछ दूर चलते ही,
खुद ब खुद दिख जाते हैं
बाकी के रास्ते।

– मनीषा कुमारी

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व्यवस्थापन

व्यकूलता, व्यग्रता,
व्यापक हो गई।
व्याकरण में,
व्याघात है आई।
व्यापकता है हर ओर छाई,
व्याख्यान कोई कर न लाई।
व्यापार,व्यापारी व्यापी हुए,
व्यामोह भी बढ़ता जाए।
व्यस्त व्यवहारिकता बढ़ी चले,
व्येक्ति न है व्येसनी ज़्यादा।
व्येक्तित्व को अपने निखारता,
व्यायाम संग जीवन,
व्यतीत है करता।
व्यवहार्य रूप से खुद को अपनाता,
व्यवस्थापन से है जीवन भर का नाता।

– मनीषा कुमारी

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Musings

एक बात दबी रही

दुनिया की इस मस्ती में,
दुनिया की इस कश्ती में,
दुनिया की आँखों से,
दुनिया के नगरों को देखा,
दुनिया के रंग रोगन में,
एक दाग छुप सा गया।
एक बात दबी रही,
सिहाई में बंधी रही।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

जाने क्या सोंचकर

जाने क्या सोंचकर,
हालातों को छोड़ कर।
बैठा किसी मोड़ पर,
वो आवाज़ दे रहा।
देखलो ध्यान से,
देख मंजिल की राह पर,
कहीं ध्यान तो नही मोड़ रहा।

– मनीषा कुमारी

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Friendship Musings

दोस्ती और दुनिया

दोस्तों की दोस्ती,
यारों की यारी।
आयी सबकी बारी,
ये दोस्तों की नामावली।
दोस्ती है अपनी तगड़ी,
ये बातों की रैली।
लगे है दुनिया,
जैसे हो जलेबी।
तू हो संग,
तो लगे है दुनिया,
जैसे कोई सीधी सी जलेबी।

– मनीषा कुमारी

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Musings

डर लगता है…

कौन कब बदल जाये,
ये डर लगा रहता है।
कौन कब बिगड़ जाये,
ये डर लगा रहता है।
डर से मुलाकात तो,
बहोत हुई रास्ते में,
लेकिन डर से भी,
कभी कभी डर लगता है।

– मनीषा कुमारी

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खिलोने टूट जाते हैं

खिलोने टूट जाते हैं,
सपनों के साथ।
अपने रूठ जाते हैं,
वक्त के साथ।
बचपन बिछड़ा है,
तानों के साथ।
खुद से बिखरे हैं,
है ज़माने का हाथ।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings

कहता है मन

कहता है मन,
की कुछ नही सोचूंगा
लेकिन कुछ सोंचे बिना
रहता भी नही।
शुरू करता है पुरानी बातें
तो रुकता भी नही।
हर बार बेहजता है
भावनाओं की दरिया में,
और कहता है बहूँगा नही।
सोंचता है सबके लिए
और कहता किसी से मतलब क्या है।
फिर वही कहता है मन
की सोचूंगा नही।

– मनीषा कुमारी