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Friendship Motivational Musings poetry

पूरी बात तक नहीं करते

बरसों का याराना,
यूँ ही तोड़ देते हैं लोग।
न इन्हें दर्द होता है,
न इन्हें फर्क पड़ता है
समय से बाँध देते हैं
सबंध को ये लोग
बंद हो जाते हैं इनके मुँह
पूरी बात तक नहीं करते,
लगता है, खत्म हुआ मतलब हमसे,प
इसलिए अब मुँह फेर लिया करते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

दिल का परिंदा

परिंदों सा दिल
गया है मिल
जा कर कहीं, फूलों में खिल।

देखने को मुड़ा कोई,
कहानी बनी नई,
दिल में हल चल हुई कोई नई

जा कर देखा, है किताबों की लड़ी,
दिल में एक खुशी सी उमड़ी,
सारी खुशियाँ हो जैसे, उसी में जड़ी।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

छोटी छोटी बातों को

यूँ छोटी छोटी बातों को हम,
क्यों पकड़ा करते है।
हर बात को क्यों खींचा करते हैं,
रोज़ रात को सोंचते हैं
हम सिर्फ सोंचा ही करते हैं।
खुद को संभालना भी,
बहुत मुश्किल काम है।
हम खुद को रोज़ बनाया करते हैं,
रोज़ एक नई सोंच से हम
गुजरा करते हैं।
जाने क्यों हम,
छोटी छोटी बातों को
हम पकड़ा करते हैं।

– मनीषा कुमारी

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Musings poetry

रिश्ता तिख्खा नहीं करना चाहिए…

बैठी तो रहती नहीं
और आपसे कुछ कहती नहीं…
बात छोटी सी है
हम आपको जानते नहीं….
इसलिए आपके बारे में,
कुछ कहते नहीं
कुछ पल रहना हो जहाँ,
वहाँ खुशियाँ फैलानी चाहिए।
तीख्खे वचनों से,
रिश्ता तिख्खा नहीं करना चाहिए।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

क्या करें….

क्या करें
बहुत बड़ी बात है,
छोटा सा डर है
लेकिन लगता डर का महल है।
लोगों के लिए
ये छोटी सी बात है।
कैसे बता दें
इस डर का कारण
जब खुद को ही
याद नहीं
इस डर की वजह
बस शुरुआत हुई थी
और अब तक चल रही।
ये सिल सिला ज़रूर,
कभी न कभी तो
खत्म होगा।
बस हिम्मत बहुत
जुटानी पड़ती है।
क्या करें,
बहुत बड़ी बात है।
छोटा सा डर है,
लेकिन लगता डर का महल है।

– मनीषा कुमारी

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Motivational Musings poetry

हम कामचोर नहीं….

करना बहुत कुछ है,
बस मन नहीं करता।
वक्त तो बहुत है,
लेकिन कुछ समझ नहीं आता।
तुम हम पर दोष लगाते हो,
लेकिन कभी तुमने भी तो,
कभी हमारे कर्म को नहीं देखा।
हमने जो भी किया,
तुमने कभी ध्यान नहीं दिया।
मेहनत रख दी तुम्हारे सामने,
और तुमने हमेशा नज़र अंदाज़ किया।
सही को तुमने जब गलत कहा,
हमने वो भी मान लिया।
हम आलसी नहीं,
बस खुद से ही नाराज़ हैं।
कामचोर नहीं हम तो
खुद में परेशान हैं।

– मनीषा कुमारी

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प्रकृति की प्रेम कहानी

प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी – साधी,
लेकिन ये कहानी,
किसी किसी को ही
समझ मे है आती।
कण कण को बटोर कर,
कभी कोई चीज़ बनाती।
कभी पल में ही किसी,
पहाड़ को मिट्टी में है मिलाती।
प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी साधी,
लेकिन ये कहानी
किसी को ही
समझ मे है आती।

– मनीषा कुमारी

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हर कहानी के पीछे

हर कहानी के पीछे
एक राज़ है,
अपनी कहानी में,
हम ही नज़रअंदाज़ हैं।
सोने से मन को
पीतल ठहरा दिया,
चांदी सा मन,
अब सोना हो गया।
हर कहानी में हर कोई,
अजूबा हो गया।
केहने को बारिश ,
यहाँ तूफाँ आ गया।
किसी की जिंदगी,
बातों से तय हो गयी।
कुछ को तो,
मगरमच्छ पे तरस आ गया।
पेंगुइन तो यूँ ही बदनाम हो गया,
केहने को कहानी,
यहाँ पूरा चलचित्र बन गया।

– मनीषा कुमारी

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सूरत और सीरत

सूरत, सीरत मिल जाये साथ,
तो कमाल हो जाये,
लेकिन हो अगर साथ,
तो कोई जीने नहीं देगा।
सूरत पे मरते लोग,
सीरत कोई नहीं देखता
और जो सीरत देखता है
वो सूरत नहीं देखता।
सूरत, सीरत मिलना साथ
ज़रा मुश्किल है।
मिल जाये साथ तो
कोई यकीन नहीं करता।

– मनीषा कुमारी

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शब्दों की हेरा फेरी

शब्दों की हेरा फेरी में,
बात बदल जाती है।
असल बात को छोड़,
शब्द झूठ के पीछे भागती है।
फूलों की कयारी में,
काँटों की आबादी है।
हर सच झूठ है,
यहाँ झूठ ही टिकने वाली है।

– मनीषा कुमारी