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Motivational Musings poetry

हम कामचोर नहीं….

करना बहुत कुछ है,
बस मन नहीं करता।
वक्त तो बहुत है,
लेकिन कुछ समझ नहीं आता।
तुम हम पर दोष लगाते हो,
लेकिन कभी तुमने भी तो,
कभी हमारे कर्म को नहीं देखा।
हमने जो भी किया,
तुमने कभी ध्यान नहीं दिया।
मेहनत रख दी तुम्हारे सामने,
और तुमने हमेशा नज़र अंदाज़ किया।
सही को तुमने जब गलत कहा,
हमने वो भी मान लिया।
हम आलसी नहीं,
बस खुद से ही नाराज़ हैं।
कामचोर नहीं हम तो
खुद में परेशान हैं।

– मनीषा कुमारी

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प्रकृति की प्रेम कहानी

प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी – साधी,
लेकिन ये कहानी,
किसी किसी को ही
समझ मे है आती।
कण कण को बटोर कर,
कभी कोई चीज़ बनाती।
कभी पल में ही किसी,
पहाड़ को मिट्टी में है मिलाती।
प्रकृति की प्रेम कहानी
है बहुत सीधी साधी,
लेकिन ये कहानी
किसी को ही
समझ मे है आती।

– मनीषा कुमारी

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हर कहानी के पीछे

हर कहानी के पीछे
एक राज़ है,
अपनी कहानी में,
हम ही नज़रअंदाज़ हैं।
सोने से मन को
पीतल ठहरा दिया,
चांदी सा मन,
अब सोना हो गया।
हर कहानी में हर कोई,
अजूबा हो गया।
केहने को बारिश ,
यहाँ तूफाँ आ गया।
किसी की जिंदगी,
बातों से तय हो गयी।
कुछ को तो,
मगरमच्छ पे तरस आ गया।
पेंगुइन तो यूँ ही बदनाम हो गया,
केहने को कहानी,
यहाँ पूरा चलचित्र बन गया।

– मनीषा कुमारी

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सूरत और सीरत

सूरत, सीरत मिल जाये साथ,
तो कमाल हो जाये,
लेकिन हो अगर साथ,
तो कोई जीने नहीं देगा।
सूरत पे मरते लोग,
सीरत कोई नहीं देखता
और जो सीरत देखता है
वो सूरत नहीं देखता।
सूरत, सीरत मिलना साथ
ज़रा मुश्किल है।
मिल जाये साथ तो
कोई यकीन नहीं करता।

– मनीषा कुमारी

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शब्दों की हेरा फेरी

शब्दों की हेरा फेरी में,
बात बदल जाती है।
असल बात को छोड़,
शब्द झूठ के पीछे भागती है।
फूलों की कयारी में,
काँटों की आबादी है।
हर सच झूठ है,
यहाँ झूठ ही टिकने वाली है।

– मनीषा कुमारी

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कुछ नहीं लिखा

कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल बहुत थे।
आसमाँ में बादल,
और यहाँ विचार बहोत थे।
छलक रही थी,
विचारों की नदियाँ,
लेकिन विचार,
आपस में भीड़ रहे थे।
कहने को विचार,
लिखने को, आपस लड़ रहे थे।
कुछ नहीं लिखा,
मगर ख्याल, बहुत आ रहे थे।

     – मनीषा कुमारी

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ख्याल नहीं रहता बातों का

कभी- कभी कुछ बातों का,
ख्याल नहीं रहता।
जिंदगी में कुछ लोगों का,
पता नहीं चलता।
लिखना था,
किसी ओर की कहानी।
गलती से,
खुद की कहानी लिख बैठे।

– मनीषा कुमारी

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कदर बातों की

कभी बे मतलब की,
बातों में लगे रहे।
कभी बातों की,
कतार में खड़े रहे।
जिन बातों की,
तलाश में लगे रहे।
उस बातों की,
ध्यान में लगे रहे।
कदर उन बातों की,
अब किसी को न रहे।

– मनीषा कुमारी

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दूसरों की बातों पे आना….

दूसरों की बातों पे,
आना आसान है।
कभी खुद से
कुछ सोंच के देखो,
कभी खुदसे
किसी के बारे में जान के देखो।
बिना तालाब में डूबे,
तालाब की गहराई का
पता नहीं लगता।
बिना फल खाये,
फल का स्वाद पता नहीं चलता।
यहाँ नेता कैसा है,
वो चुनाव के बाद पता चलता है
और लोग
किसी रेहन सहन के तरीके से ही
किसी का चरित्र भाँपने लगते हैं।

– मनीषा कुमारी

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कभी – कभी हम…

कभी – कभी हम
कुछ बोल के भी,
बोल नहीं पाते।
रोकना है किसी को,
लेकिन रोक नहीं पाते।
बातें बहोत सी है कहने को,
बस कह नही पाते।
रोने के सिवा ,
कभी – कभी कोई चारा नहीं होता।
गुस्सा करने का
कोई फायदा नहीं होता
कुछ बातें भूल के भी भूल नहीं पाते।
जीने को जी लेते हैं,
कहने को कुछ बोल नहीं पाते।

– मनीषा कुमारी