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काम

तेरी बिना सब कुछ अधूरा लगता है
तू नही तो सब कुछ सुना लगता है
जिंदगी जैसे पलट सी गई हो
कोई ख्वाब डूब सा गया हो।
तू नही तो पेर थम से गये है,
सब जैसे कहि खो से गये है।
तू मिल जाएगा तो सब ठीक
वरना जिंदगी कैसे कटेगी कुछ पता नही।

– मनीषा कुमारी

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शिकायत

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शिकायत है तुमसे मुझे
शिकायत है सबसे मुझे
शिकायत दूसरे से ही क्यों
कभी खुद से शिकायत कीजिये
कभी खुद पे ध्यान दिजीये
कभी खुद को सुधार लीजिये
दूसरों की गलती को
नजर अंदाज कर
खुद की गलती मान लीजिये।

– मनीषा कुमारी

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Plastic

All knows that plastic is one of a problem of our country. Also this is a problem of whole world. Because of plastic is not disposable thing that’s why land pollution type of problems are spreading. When plastic is mix with landfills, it interacts with water and form hazardous chemicals. When these chemicals seep underground, they degrade the water quality. Which is reason bhind the less amount of drinking water and barren land.

Also wind carries and deposits plastic from one place to another, increasing the land pollution. Even though plastic is responsible for land pollution but also plastic is useful that’s their is no way to stop using plastic. But it is also made from toxic compounds known to cause illness. Burning of plastic in the open air, leads to environmental pollution due to the release of poisonous chemicals.

All because of above reason we have to do something. That’s why government also takes actions like cleaning rivers, beach place and recycle the plastic waste. One thing that all know that don’t throw plastic or other waste here and there but very few people follow this. These thing about plastic was known by all people but most of the people don’t want to do these thing because of seeing each other like even that people throw garbage every where so why we will do this.

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http://www.globalcitizen.org/en/content/wins-fight-against-plastic/

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Life

Life is not that way
which we think
it is worst than that.
It is sometime good or bad sometime happy sometime sad. Sadness is not for everytime, because day never become night that’s why people have future bright.

– Manisha kumari

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Book review of ” मानवता की झांकी”

लेखक – स्वामी जपनन्द

प्रकाशक – स्वामी ब्रह्नस्थानन्द, अध्यक्ष रामकृष्ण मठ, राम कृष्ण आश्रम मार्ग, धंतोली, नागपुर – 440 012

मूल्य – 29.50₹

ई – मेल – rkmathnagpur.orgEbook 

इस किताब में एक सन्यासी की कहानी है जिसमे सनयेसी कई जगहों पर जाता है ईश्वर की तलाश में कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस यात्रा में सनयेसी को कई तरह के व कई धर्म के लोग मिलते है जो कि सन्यासी की काफी मदद भी करते है। इस पुस्तक में लेखक ने सन्यासी व उसकी मदद करने वाले लोगों के जरिए ये बताने का प्रयास किया है कि मानवता अभी भी जिन्दा है कही  न कही भले ही बहोत कम है लेकिन है। भले ही ये अलग धर्म, जाती, देश से तालुक रखते हो लेकिन सन्यासी की मदद करने के लिए कोई भी पीछे नही हटा। ये कहानी हमारे देश मे मानवता को दर्शाती है।


इस कहानी से मुझे लगता है कि भले ही हम किसी पर निर्भर हो या न हो वो हमारी मर्जी है लेकिन हमें अपना मानव धर्म बिल्कुल नही भूलना चाहिए। किसी की मदद करने से कोई छोटा नही हो जाता। इस पुस्तक में लेखक हर एक पंक्ति को हर एक कहानी के पात्र बहोत अच्छे से समझाया है जो कि इस पुस्तक को रोचक बनाती है। 

– मनीषा कुमारी

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जिंदगी

दुनिया दुनिया कहते रहे
दुनिया छूट गई,
मंजिल तो आगे थी पीछे जमाना छोड़ गई,
समझदारी समझ छोड़ उलझ गई,
जिंदगी की नाव बीच समंद्र में ही छोड़ गई
जिंदगी की आखरी मोड़ पर ही
जिंदगी समझ आ गई।

– मनीषा कुमारी

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कला

ये कला है,

ये चित्रकला है,

ये ज्वाला है।

इसे दबाओ मत,

निचोड़ो मत,

क्योंकि हर कला में

भगवान का ही बसेरा है।

ये गीत – संगीत,

ये खेल – कूद,

ये कला के ही रूप है।

घटता है कला का मान आजकल,

कम है कला की पहचान आजकल।

बीत रहा जीवन व्यर्थ है,

कदर करलो अभी भी वक्त है।

– मनीषा कुमारी

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दोस्ती

दोस्त हो के दोस्ती का मान रखना ,

याद करके फिर न भूल जाना।

भले ही नाटक करले याद करने का ,

अब तो ये नाटक भी अच्छा लगता है।

दोस्त दोस्ती के खातिर और

दोस्ती दोस्त के खातिर होती है,

इसलिए तो दोस्त और दोस्ती

दोनों ही अनमोल होती है।

– मनीषा कुमारी

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यादें

समय का इंतजार करते करते
समय बीत जाता है,
समय तो बचपन जैसे पीछे ही
छूटता जाता है।
जिंदगी की इस राह में समय के पाबंद लोग
भी थम जय करते है।
अगर बीत जाए लम्हा तो वापस नही आता लेकिन यादों का सिलसिले रोके नही रूकते,
बीच काम मे ही कहीं से वापस आजाया करता है।

– मनीषा कुमारी

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शांत रहने की ताकत

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शांत जीवन वयतीत करना कोई बुरा बात नही होती लेकिन फिर भी लीगों को दिक्कत होने लगती है पता नही क्यों शांत लोग उन्हें भाते नही लेकिन देश में शांति जरूर चाहते है। गजब दुनिया लगती है अतरंगी लोग है जिसमें। लोगों को पता होने के बावजूद की शांत जीवन सही और अच्छा होता है लोग नफरत करने पर ज्यादा विश्वाश करते है।

नफरत सच मे बहोत बुरी चीज़ होती है कभी भी किसी से भी हो सकती। आज कल दुनिया मे किसी को किसी से नफरत करने के लिए किसी वजह की जरूरत नही होती। आज कल तो लोग बिना एक दूसरे को जाने भी नफरत कर लेते है। कुछ लोगों को छोटे बच्चे से नफरत होती है और कुछ को अपने ही बच्चे से ही नफरत होती है। नफरतों का पहाड़ खड़ी कर रहा दिवार है। भाई – भाई को लड़ा रहा है वैसे भाइयों की लड़ाई पुरानी होगई क्यों की अब नया तमाशा आया है पड़ोसी – पड़ोसी भी लड़ते है। और कुछ लोग तो लड़ने का बहाना ढूंढा करते है। मेरे आसपास भी कई सारे ऐसे लोग रहते है भले ही शायद से अच्छे हो लेकिन नफरत करने कि नीति पर पूर्ण विश्वाश रखते है। इसमें तो पड़ोसी लोग तो पहले है लेकिन मुझे बचपन से सिखाया गया ह किसी के बारे में बुरा बोलना नही चाहिए लेकिन झूट भी नही बोलना चाहिए।

एक बात तो सब जानते है कि जो लोग ज्यादा गुस्सा या नफरत करते है उनसे अगर प्यार से बात की जाए तो वे शांत हो सकते है। यानी अगर हम अपना स्वभाव शांतिपूर्वक रखेंगे तोहमरे जिंदगी की आधे से ज्यादा परेशानियां दूर हो सकती है। एक तरह से हम इसे अहिंसा वाद फैलाना भी कह सकते हैं जिसकी प्रेरणा खुद महात्मा गांधी जी ने दी थी। उन्होंने अहिंसा और सत्य के बल पर देश को आजाद करवाया था। यह उनकी दी हुई सबसे अच्छी सिख है।