Category: Dairy

  • दुपट्टा

    दुपट्टे को क्या कहूँ,ये तो है हथियार नया।कभी बन जाता है, औज़ार मेराकभी श्रृंगार का सामान है,कभी खुद की पहचान है,कभी खुद का सम्मान है,कभी खेलने की चीज़ नई,कभी बढ़ता इससे,आत्मसम्मान है। – मनीषा कुमारी

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  • चाँद और तारे

    तारा नाराज़ है चाँद सेऔर चाँद नाराज़ है तारे सेरोशनी दोनों की अपनी नहींफिर भी परेशान हैं एक दूसरे से।चाँद और तारे दोनोंएक साथ होते पूरे।जो दोनों साथ न होते तोआसमान की खूबसूरती निचोड़े।                     – मनीषा कुमारी

  • तुम अभी आए भी नहीं….

    इंतज़ार करते करतेइंतजार फीका पड़ गया।किसी को हमारा प्यारतीखा पड़ गया। तुम्हें खुश करते-करतेहम दुखी हो जाते हैंतुम अभी आए भी नहींऔर हम तुम्हारे सपने सजाते हैं। खुद को अच्छा करते करतेबुरे रास्ते पर चले जाते हैंतुम अभी आए भी नहींहम तुम्हारा मिजाज़ सुधारना चाहते हैं। तुम्हारी फिक्र करते करतेहम खुद को भूल जाते हैंतुम […]

  • परेशानियाँ नहीं थी वजह….

    परेशानियाँ नहीं थी वजह,लिखने की।लेकिन श्रेय,परेशानियों को देती रही।ढूंढ – ढूंढ के परेशान होती रही,परेशानियों को।कला खुद में थी,और भटकती रही,दुख की गलियों में।चार साल में अब समझी,की भावनाएँ दिल का खिलौना है।जब चाहे जैसे चाहेभावों को डालो।चाहो तो हर पल खुश रहलोऔर चाहो तो,हर वक्त दुख के सागर में डुबो। – मनीषा कुमारी

  • गुणों का नाश

    दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती हैइस पल कुछ औरदूसरे ही पल कुछ औरये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।कुछ ही पलों में,जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।जल्दबाज़ी से गुणों का,फासला आजाता है।गुण बनते हैं धीमी आँच पे,जल्दबाज़ी से तो गुणों कानाश ही होता है। – मनीषा कुमारी

  • शाम से एक उलझन है..

    शाम से एक उलझन है,बेचैन करती बातें हैं,की बोलना जरूरी है,या बोलकर ही कोई पाप है।जाने अनजाने में किसी से,घूमने की बात कर ली,किसी से बात करने की बात करली,भले घूमने का इरादा हमारा,जरा भी न था।बातें तो खुद के सिवा,किसी से न कि,फिर इल्जाम ऐसा लगा,जिसके बारे में हमने कभी,कभी भी नही सोंचा।हमे बात […]

  • सोशल मीडिया और प्रेम

    सोशल मीडिया और प्रेम का तो पता नही,लेकिन सोशल मीडिया से प्रेम ज़रूर देखा।कभी रात भर जागे,कभी दिन भर ताकते रहे इसे।हर भाव में इसे निहारा,कभी संग बहुत समय बिताया।कभी नेट धीरे होने से,पूरा दिन मन लगा के काम किया,नही तो सिर्फ उसके प्यार में डूबा ही देखा। – मनीषा कुमारी

  • पता नही

    देखो चाशनी जल रही,अब तक मिठाई त्यार नही।लोग तरस रहे प्यार को,यहाँ प्यार क्या है वही पता नही।        – मनीषा कुमारी

  • खुशी की खेती

    खुशी की खेती जैसे अनाजों की खेती,उपयोग सभी को करना है,लेकिन उगानी नही किसी को।खानी सबको है,लेकिन बैचनी नही किसी को। रखना सबको है,लेकिन देना नही किसी को।ये खुशी की खेतीकरनी नहीं किसी को,लेकिन इस्तमाल करनी है सबको। खुशियाँ बाँटोगे तो बढ़ेगीगम से गम को मिलाओगे तोसिर्फ गम का माहौल बनाएगी।बोओगे बीज खुशियों के तोये […]

  • लोगों की बातें, लोगों की सोंच…

    शायद सच नही मेरा सच,लेकिन कहने में कैसा खर्च।लोगों की बातें,लोगों की सोंच।हम कुछ भी कहे,उनको गलत ही है सोंचना। – मनीषा कुमारी