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Dairy microtale Motivational poetry

शाम से एक उलझन है..

शाम से एक उलझन है,
बेचैन करती बातें हैं,
की बोलना जरूरी है,
या बोलकर ही कोई पाप है।
जाने अनजाने में किसी से,
घूमने की बात कर ली,
किसी से बात करने की बात करली,
भले घूमने का इरादा हमारा,
जरा भी न था।
बातें तो खुद के सिवा,
किसी से न कि,
फिर इल्जाम ऐसा लगा,
जिसके बारे में हमने कभी,
कभी भी नही सोंचा।
हमे बात न करने आई,
वार्ना बातों की रंगोली बिखेरना,
हम भी जानते थे।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

सोशल मीडिया और प्रेम

सोशल मीडिया और प्रेम का तो पता नही,
लेकिन सोशल मीडिया से प्रेम ज़रूर देखा।
कभी रात भर जागे,
कभी दिन भर ताकते रहे इसे।
हर भाव में इसे निहारा,
कभी संग बहुत समय बिताया।
कभी नेट धीरे होने से,
पूरा दिन मन लगा के काम किया,
नही तो सिर्फ उसके प्यार में डूबा ही देखा।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational Musings poetry

पता नही

देखो चाशनी जल रही,
अब तक मिठाई त्यार नही।
लोग तरस रहे प्यार को,
यहाँ प्यार क्या है वही पता नही।

       – मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational poetry

खुशी की खेती

खुशी की खेती जैसे अनाजों की खेती,
उपयोग सभी को करना है,
लेकिन उगानी नही किसी को।
खानी सबको है,
लेकिन बैचनी नही किसी को।
रखना सबको है,
लेकिन देना नही किसी को।
ये खुशी की खेती
करनी नही किसी को।

– मनीषा कुमारी

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Dairy microtale Motivational Musings poetry

लोगों की बातें, लोगों की सोंच…

शायद सच नही मेरा सच,
लेकिन कहने में कैसा खर्च।
लोगों की बातें,
लोगों की सोंच।
हम कुछ भी कहे,
उनको गलत ही है सोंचना।

– मनीषा कुमारी

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Dairy microtale Motivational Musings poetry

लालची हमे बताते हो..

नाखूनों को देख तकदीर बताते हो,
खुद पैसे खाते हो,
लालची हमे बताते हो।

– मनीषा कुमारी

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Dairy Motivational Musings poetry

वो बुरा ही समझेंगे

जिसकी जैसी सोंच है,
वो वैसा ही सोंचेगा।
तुम लाख सफाई देदो,
वो तुम्हे बुरा ही समझेंगे।

– मनीषा कुमारी