Categories
Dairy Motivational poetry

परेशानियाँ नहीं थी वजह….

परेशानियाँ नहीं थी वजह,
लिखने की।
लेकिन श्रेय,
परेशानियों को देती रही।
ढूंढ – ढूंढ के परेशान होती रही,
परेशानियों को।
कला खुद में थी,
और भटकती रही,
दुख की गलियों में।
चार साल में अब समझी,
की भावनाएँ दिल का खिलौना है।
जब चाहे जैसे चाहे
भावों को डालो।
चाहो तो हर पल खुश रहलो
और चाहो तो,
हर वक्त दुख के सागर में डुबो।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy Motivational poetry

गुणों का नाश

दो दिन में युँ जिन्दगीयाँ बदल जाती है
इस पल कुछ और
दूसरे ही पल कुछ और
ये जीन्दगी धूंधली सी नजर आती है।
कुछ ही पलों में,
जमीन – आसमाँ का अन्तर आ जाता।
जल्दबाज़ी से गुणों का,
फासला आजाता है।
गुण बनते हैं धीमी आँच पे,
जल्दबाज़ी से तो गुणों का
नाश ही होता है।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy microtale Motivational poetry

शाम से एक उलझन है..

शाम से एक उलझन है,
बेचैन करती बातें हैं,
की बोलना जरूरी है,
या बोलकर ही कोई पाप है।
जाने अनजाने में किसी से,
घूमने की बात कर ली,
किसी से बात करने की बात करली,
भले घूमने का इरादा हमारा,
जरा भी न था।
बातें तो खुद के सिवा,
किसी से न कि,
फिर इल्जाम ऐसा लगा,
जिसके बारे में हमने कभी,
कभी भी नही सोंचा।
हमे बात न करने आई,
वार्ना बातों की रंगोली बिखेरना,
हम भी जानते थे।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy Motivational poetry

सोशल मीडिया और प्रेम

सोशल मीडिया और प्रेम का तो पता नही,
लेकिन सोशल मीडिया से प्रेम ज़रूर देखा।
कभी रात भर जागे,
कभी दिन भर ताकते रहे इसे।
हर भाव में इसे निहारा,
कभी संग बहुत समय बिताया।
कभी नेट धीरे होने से,
पूरा दिन मन लगा के काम किया,
नही तो सिर्फ उसके प्यार में डूबा ही देखा।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy Motivational Musings poetry

पता नही

देखो चाशनी जल रही,
अब तक मिठाई त्यार नही।
लोग तरस रहे प्यार को,
यहाँ प्यार क्या है वही पता नही।

       – मनीषा कुमारी

Categories
Dairy Motivational poetry

खुशी की खेती

खुशी की खेती जैसे अनाजों की खेती,
उपयोग सभी को करना है,
लेकिन उगानी नही किसी को।
खानी सबको है,
लेकिन बैचनी नही किसी को।
रखना सबको है,
लेकिन देना नही किसी को।
ये खुशी की खेती
करनी नही किसी को।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy microtale Motivational Musings poetry

लोगों की बातें, लोगों की सोंच…

शायद सच नही मेरा सच,
लेकिन कहने में कैसा खर्च।
लोगों की बातें,
लोगों की सोंच।
हम कुछ भी कहे,
उनको गलत ही है सोंचना।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy microtale Motivational Musings poetry

लालची हमे बताते हो..

नाखूनों को देख तकदीर बताते हो,
खुद पैसे खाते हो,
लालची हमे बताते हो।

– मनीषा कुमारी

Categories
Dairy Motivational Musings poetry

वो बुरा ही समझेंगे

जिसकी जैसी सोंच है,
वो वैसा ही सोंचेगा।
तुम लाख सफाई देदो,
वो तुम्हे बुरा ही समझेंगे।

– मनीषा कुमारी