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Happiness is so expensive gift from god

Each and every person is busy even if they have job or not. All are running on the road of success to resist everyone. In this life happiness is lost somewhere that’s why very few people are happy. But mahatma gandhiji once said about that

Happiness is when what you think, what you think, what you say and what you do are in harmony.” – Mahatma Gandhi

It means that happiness is not that thing which we have to find everywhere because it is live inside us. We all creat happiness inside by oneself. So, there is no means to get upset.

Smile is that thing which gives us satisfaction and relief. One thought I always remember, which I saw beside road and sometime repeat in my mind that “Little mind have only wishes but great mind have purpose to do anything in any situation.” This thought changed me and improved me. One thing which I say in busy life and in stressed mind whenever you want refreshment in your life then remember that do those thing which your heart telling you to do. Seeing T.V. and living online on social media for long hours it is not a way of happiness because that thing never gives us satisfaction so set time for that. You can do drawing, dancing, painting, play outdoor games and indoor games also for fun or do other thing in which you are interested.

One more thing I want to say that make to do list in every morning like set your time for doing work, for refreshing yourself etc. In our life every thing is important so learn something new in every moment of your life and enjoy in every moment of your life. Because happiness is very expensive gift from god which is given to every person in the world.

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Formula for becoming wealthy or successful person

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Most of the people in the world want wealthy in their life and want to become rich overnight. The people who want to become rich they do hard work or taking short cuts in life to become become rich. But becoming rich is not so easy. I read one book about this whose author author is will Edwards and his book name is ” Napoleon Hill’s Awesome Secret”. In his book he mostly talk about Napoleon Hill’s book “Think and grow rich”. Many people knows very well about this book also some of them read this book too.


In the book of “Napoleon Hill’s Awesome Secret” Will Edward written about Napoleon Hill’s thought and ideas. In Will Edwards book Napoleon hill said some major points to become rich. That points are, those people who want to become rich have their specific aim or chief aim, you have a confidence on yourself, you have to believe on yourself, accept all the situation, plan your success path, you gave to leave your negative attitude, habit of saving, become an effective leader, power of imagination, self control, you need to be specific about the amount, investment is also important for that and think big. But most of the people become greedy about wealth. If you want to success in life or you want to wealthy the process is same. If you want to become greedy then grow your greed in your work not for money. We all know that money is important for surviving now days but focus on your work, do some hard work and continuously repeat it and one day you will definitely become wealthy.


Think big do big and stay in a motion on your dream and do atleast one step of your dream or work daily. First thing is to believe in yourself and also believe in god that you can succeed.

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Book review of ” विद्यर्थियों के लिए एकाग्रता का रहस्य”

लेखक – स्वामी पुरुषोत्तमाननंद

 प्रकाशक – स्वामी ब्रह्नस्थानन्द                अध्यक्ष, रामकृष्ण मठ               

रामकृष्ण आश्रम मार्ग, धंतोली,                  नागपुर – 440012                 rkmathnagpur.org

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एकाग्रता सबके लिए जरूरी है चाहे वो इंसान जो भी कम करता हो या विद्यार्थी ही क्यों न हो। एकाग्रता भंग होते ही कोई दुर्घटना हो सकती है। अक्सर हमने लोगों की यह भी कहते सुना होगा कि नजर हटी दुर्घटना घटी। यानी एकाग्रता के भंग होते ही वे किसी दुर्घटना का रूप ले सकता है या तो कोई छोटी – मोटी समस्या उत्पन्न हो सकती है। एकाग्रता को कहीं से सीखना की जरूरत नही होती, एकाग्रता का विकास कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना स्यम से करते रहने से हो जाता है। 


खुद को एकाग्र करने के लिए जरूरी है, अपने मन की सयमित रखना। कोई भी कार्य करने से पहले अपने मन को सयमित करके उस कार्य को सावधानी पूर्वक करने से ही कोई काम अच्छे से किया जा सकता है। किसी भी कार्य को अगर ध्यान के साथ निरंतर किया जाए तो ही अपने मन मस्तिष्क को जल्द ही एकाग्र किया जा सकता है। इस पुस्तक में अर्जुन द्वारा श्री कृष्ण जी से एकाग्रता पर पूछे गए प्रश्न का उतर श्री कृष्ण जी फवारा किस प्रकार दिया गया है इसका उल्लेख किया गया है साथ ही अन्य विद्वानों की भी चर्चा की गई है। लेखक ने मन की चंचल प्रवृत्ति और उसे काबू में कैसे किया जाए इसकी चर्चा की गई है। स्वामी पुरुषोत्तमाननंद जी ने अपनी इस पुस्तक में विद्यार्थी किस प्रकार अपने मन को एकाग्रचित करके आगे बढ़ सकते है इसका उल्लेख किया है साथ ही उन्होंने इसका कारण भी बताया है कि किसी विद्यार्थी में एकाग्रता का भाव क्यों नही होता है।

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Review of the ” पर्सनेलिटी डेवलोपमेंट कोर्स”

लेखक – सी. एम. श्रीवास्तव

प्रकाशक – मनोज पब्लिकेशनस, 761, मेन रोड, बुराड़ी, दिल्ली – 110084

ईमेल -info@manojpublications.com

वेबसाइट – http://www.manojpublications.com

मुल्य – 80 ₹


सी. एम. श्रीवास्तव जी ने इस पुस्तक में किसी व्यक्ति के व्येक्तित्व को विकसित करने के कई उपाए बताये है। व्येक्तित्व के विकास के लिए जो ज़रूरी तत्व होते है उसके आधार पर लेखक ने अध्यायों को बांटा है। आज कल तो व्यक्तित्व का विकास करना बहुत जरूरी हो गया है। अपने व्येक्तित्व का विकास करके हम अपने अंदर के कमियों को दूर कर सकते है। व्येक्तित्व के विकास के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है बातचीत का सलीका होना। साक्षात्कार देते समय भी सही तरह से बातचीत करके वे आत्मविश्वाश से साक्षात्कार को जिता जा सकता है। इस किताब को पढ़ने से पहले मुझमे भी कई कमियां थी जैसे आत्मविश्वाश की कमी होना आदि। इस किताब को पढ़ने के बाद मुझमे काफी बदलाव भी आये है। पहले मैं काम बोलती थी वैसे तो आज भी मुझे बोलना पसंद नही है लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद इतना तो किताब का असर हुआ ही कि मै अब बोलने  में इतना हिचकिचाती नही और मेरे अंदर भी बहोत गए है कि अब किसी चीज़ से इतना डरती नही। मेरे जैसे कई लोगों को देख है मेने जो अपनी बात किसी से कहने में हिचकिचाते है। अधिकतर लोग बातचीत करने में असफल है क्योंकि उन लोगों को बातचीत करने का सलीका नही पता होता है। किस मोके पर कोनसी बात कहना उचित है और कोनसी अनुचित है, इस बात का उन्हें ज्ञान नही होता एहि नही कुछ लोगों को तो बात करने की शुरुआत ही नही करनी अति। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग होते है जो एक बार बोलना शुरू करते है तो बोलना बंद ही नही करते और दूसरों की सुनने पर कम से कम ध्यान देते हैं। ऐसे लोग जब बोलना प्राम्भ करते है, तो दूसरे लोग उनकी बातों पर धीरे – धीरे कम ध्यान देने लगते है। 
व्येक्तित्व के विकास के लिए हमे हर किसी की बातचीत को ध्यान से सुने। बातचीत करते समय अपनी बात के साथ दूसरों को भी बात करने का मौका दें, सामने वाले कि भी सुने। बातचीत करते समय अगर किसी ने अच्छी बात कही है तो उसकी तारीफ भी करनी चाहिए साथ ही किसी की बात के बीच मे बाधा न डालें। 
इस पुस्तक की मदद से आप अपनी कई आदतों वे कई प्रकार की कमियों को दूर किया जा सकता है। अच्छे गुण सबमें होते बस जरूरत होती है उसे जानने की ओर अपने अंदर विकसित करने की। इस पुस्तक में लेखक ने अपने क्रोध को कैसे काबू में रखे इस बारे में भी बताया है। इस पुस्तक की मदद से आप अपने व्येक्तित्व मे सुधार करके अपने को सफलता की ओर बढ़ा सकते है।

 

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विश्वास

विश्वास एक ऐसी चीज़ है जो हमारे स्वभाव को जल्दी परिवर्तित कर सकती है। यह पूरी दुनिया विश्वास पर टिकी हुई है। अगर हमे किसी पर विश्वास नही है तो हम कभी – भी आगे नही बढ़ सकते। किसी पर विश्वास न होना हमारे स्वभाव को इतना चिरचिरा कर देता है कि वे अपना मानसिक संतुलन भी खो सकता है। कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है जिसमे वह व्यक्ति तो दूसरों पर विश्वास करता है परंतु उसके साथ लोग इतना धोखदारी करते हैं कि उसका विश्वास दूसरों पर से बिल्कुल उठ चुका होता है। ऐसे लोंगों कुछ लोगों के परिजन भी होते है। जिससे कई लड़ाइया, मौतें होती हैं। वे सोचते हैं कि मैने अगर ऐसा नही किया तो वे उस चीज़ को तबाह कर देंगे इसलिए वे उस चीज को बचाने के लिए पहले से ही त्यारी करने लग जाते हैं जिससे उनके स्वभाव में चिरचिरेपन आ जाता है। चिचिरेपन के कारण उस व्यक्ति को कोई पसंद भी नही करता। 
स्वभाव में चिरचिराहट और किसी पर शंका करने मात्र से ही हमे कई तरह के मानसिक परिशनियाँ आती हैं जो हमे पूरी तरह से मानसिक रूप से बीमार कर सकता है। विश्वास न होने पर हमारे अंदर शक की भावना बेठ जाती है। हम हर किसी पर शक करने लगते है भले ही जो हम सोंच रहे हैं वैसा हो या न हो। हमे अपने मन में शक की भावना को नही पालना चाहिए हमे हमेशा, भले ही हम दूसरों पर भरोसा न करे लेकिन हमें आत्मविश्वाश होना चाहिए। जब हम खुद पर विश्वास करते हैं तभी हम हमारे लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
खुद पर विश्वास और लक्ष्य के प्रति संघर्ष करने का जज्बा हो तो हम कुछ भी कर सकते है। कई लोग जो दुनिया मे अकेले रहते है जिनका कोई नही है और जिसके पास कुछ भी नही है वे लोग भी सिर्फ विश्वास के दम पर ही आगे बढ़ते है। आत्मविश्वास पर चल कर आगे बढ़ने वाले कई महापुरुष रह चुके है। जो सिर्फ अपने ऊपर विश्वास रख कर और कड़ी मेहनत करके अपनी मंजिल को पाया है। यह बात हमे हमेशा याद रखनी चाहिए कि अगर सब कुछ कर सकते हैं तो हम सबकुछ कर सकते है। अगर हम सब कुछ सोंच सकते हैं तो हम सब कुछ करने की ताकत रखते हैं। एक तरह से हम आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी कह सकते हैं।
कुछ लोगों में आत्मविश्वास बिल्कुल नही होता ऐसे लोग कभी – कभी खुदखुशी करने के बारे में भी सोंच लेते हैं जो कि एक गलत रास्ता है। वैसे तो खुदखुशी के बारे में हर एक इनसान अपनी जिंदगी में सोंच ही होगा चाहे वो आज कितनी ही ऊंचाइयों को छू रहा हो। लेकिन समय पे खुद को संभाल लेना भी एक कला है। इसलिए खुद पर विश्वास रखिए और आगे बढ़ने की कोशिश करिये। अपनी पसंद को अपनी पहचान बना कर देखो तुम्हे तुम्हारी मंजिल जरूर मिलेगी। यानी जो भी काम तुम्हे पसंद हो उसमे पूरी लगन से जुट जाओ और उसी में आगे बढ़ो। जब भी हम अपने पसंद का काम करते है तो हमे खुशी मिलती है । इससे लक्ष्य प्राप्ति आसान होगी और काम करने में खुशी भी मिलेगी लेकिन इससे पहले हमें दूसरों पर विश्वास न करके खुद पर विश्वाश करना होगा। क्यूँकि ज्यादातर लोग जो दूसरों पर भरोसा रखते है अंत मे पछताते है इसलिए एक तू खुद पर विश्वास रखना चाहिए और दूसरा भगवान पर विश्वास रखने चाहिए।

– मनीषा कुमारी

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क्या जरूरी है शारीरिक स्वास्थ्य

शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रखना बहोत जरूरी है और आज कल तो इसका महत्व और बढ़ता जा रहा है। शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रखने के तरीके जानने से पहले हमें यह जानना जरूर है कि शारीरिक स्वास्थ्य क्या है? शारीरिक स्वास्थ्य यानी शरीर का स्वास्थ्य। हमारे शरीर मे जीवात्मा की वास भूमि है। इस शरीर से ही कर्म की साधना होती है। जो अपने शरीर को साफ नही रखता और जो अपने शरीर अधिक प्रयोग नही करता वे अपने खुद के शरीर को नारककुण्ड बना देते हैं, वे एक तरह से अपराधी ही है वो भी अपने ही शरीर के। जो इस शरीर की रक्षा में प्रेयत्नशील नही होते, वे भी दोषी है अपने शरीर के।

शारीरिक दुर्बलता कम से कम हमारे एक तिहाई दुखों का कारण है। अपने शरीर को स्वस्थ न रखने के कारण वे नियमित व्यायाम या अधिक शारीरिक कार्य न करने के कारण अधिकतर लोग देश मे ठीक से सांस भी नही ले पाते। इसका कारण है कि हम अपने फेफड़ों को पर्याप्त फुलाते नही है। नियमित सांस लेने वे छोड़ने वाले आसन कपलभारती, अनुलोमविलोम जैसे व्यायाम करने से शरीर शुद्ध हो जाता है। इसलिए हमेशा हमे अपने शरीर को स्वच्छ व नियमित व्यायाम करते रहना चाहिए। नियमित व्यायाम के बिना शरीर कभी ठीक नही रहता है। इसलिए रोज़ सवेरे शाम टहलो, शारीरक परिश्रम करो। शरीर के साफ वे स्वस्थ होने से मन भी उन्नत होने लगता है। कई नए व उत्तम विचार आते हैं। मुश्किल जीवन भी कुछ क्षण के लिए सरल लगने लगता है। नियमित व्यायाम से कई प्रकार के रोग से भी मुक्ति मिलती है।
नियमित  व्यायाम के साथ ही साथ शुद्ध जल वे शुद्ध भोजन को भी अपनाना चाहिए जिससे शरीर स्वस्थ रहे। अशुद्ध जल और अशुद्ध भोजन रोग का घर होता है इसलिए हमें इन चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए।

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Stray animals are also have their life

In every place and in every street we see animals and we also see that they are in a poor condition. Their is a reason behind this poor condition and these are lack of food, lack of home and also because of some people throw stones or beat the stray animals without any reason. Some of them throw stones on animals because of fear also but truth is that some animals are scared of human beings too.

People have to understand that animals are also living thing and they have their own life as well. So, don’t hurt stray animals because they have a family too. Government started organization whose name is “people for animal” which is started for animals. This organization was started by maneks gandhi on 1992. This organization help those poor animals.

I just want to say that don’t teas stray animals, don’t scare after seeing wild stray animals; in this situation just walk away from that place instead of throwing stones on them and one last thing I want to say that if you want to have a pet then take it from a street and if you are not able to feed or care that animal then don’t pet any animals. If you give you care and respect to animals then they also give care and respect to you.

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महँगाई

महँगाई शब्द के बारे में तो सबको पता ही है कि महँगाई के कारण हमारी अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। आज कल महँगाई के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या सिर्फ आज कल की नही है कुछ वर्षों पहले भी यह समस्या हमारे देश मे थी लेकिन महँगाई में फिर से उछाल आया है।

महँगाई की वजह से गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के साथ-साथ आम आदमी पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। महँगाई के कारण ही कई सरकारी कर्मचारी हड़ताल पे चले जाते हैं। महँगाई के कारण आय दिन किसानों द्वारा आत्महत्या की बात सामने आती रहती है। महँगाई के कारण लोगों की दिन चर्या में भी प्रभाव पड़ा है।

महँगाई का अनुमान हम प्याज के दामों से ही लगा सकते हैं।जिस प्याज को लोग अपनी सब्जी में रोजाना डाला करते थे आज वे प्याज का दाम 100 रुपये से अधिक हो गया है। इतना ही नही प्याज के साथ – साथ कई चीजों के भी दाम बढ़े हैं।

महँगाई के पीछे कई कारण हैं जैसे कि जनसंख्या वृद्धि, उत्पादन में कमी, संसाधनों में कमी, भ्रष्टाचार, अनुचित वितरण व्यवस्था आदि। इन सबके कारणों के पीछे कुछ वुएकती भी है जिनके कारण हमारे अर्थव्यवस्था में महँगाई जैसी समस्या है। कृत्रिम रूप से महँगाई बढ़ाने के दोषी लोगों को कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए। मुनाफाखोरी, कालाबाजारी करने वालों पर नज़र रखी जानी चाहिए। इसके लिए जनता का जागरूक होना भी ज़रूरी है।

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समय की डोर….

बीतता जाता है समय,
निकलती जाता है समय।
लेकिन जिंदगी भी तो थमती नही,
वक्त निकलता जाता है।
वक्त कभी थमता नही,
बीतता जाता है समय।

– मनीषा कुमारी

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कुदरत का करिश्मा

कुदरत का करिश्मा देखो उसमे कितनी खूबसूरती होती है। उसकी खूबसूरती और महक को जब हम अनुभव करते है तो उसमें हम पूरी तरह से खो जाते है, साँसों के अंदर ठंडक आ जाती है। जी करता है इनके ही बीच बैठ कर कुछ वक्त गुजारा जाय।

कुदरत तो सौंदर्य से भरी है ही परंतु इसने जो हमारी मदद की है उसे भी हम नही भूल सकते और न भूलेंगे। कुदरत आने वाले समय मे भी हमारे लिए वरदान बना हुआ है इस बात से तो हम बिल्कुल भी मुँह नही फेर सकते। अपने सिर से लेकर पेर तक की जरूरतें हम इसी से ही पूरी करते है। भले ही बात हो अपने स्वास्थ्य की या फिर पहनने, खाने की या और कोई जरूरत हम प्रकृति से ही प्राप्त करते है।

इसने तो कला, विज्ञान, वाणिज्य जैसे क्षेत्रों में भी कामयाबी पा ली है। प्रकृति के कई सिद्धान्तों को समझने के बाद ही विज्ञान के सिद्धांत बने है। परन्तु आज कल लोगों के अंदर प्रकृति के प्रति मूल्य घटता जा रहा है। लोग प्रकृति के मूल्य को भूल से गए है। वे अपने फायदे के लिए प्रकृति को पूरी तरह नष्ट करने में लगे हैं। इसमें वे प्रकृति से अपनी जरूरतों को तो पूरा कर लेता परंतु साथ ही साथ वहाँ पर अपनी छाप भी छोड़ देते है। जिसका परिणाम ये प्रदूषण हैं। इसका परिणाम हम हर छोटे बड़े शहरों में देख सकते हैं। अगर प्रकृति से हमे इतना कुछ प्राप्त हो सकता है तो हमे भी प्रकृति को इसके बदले कुछ देना चाहिए जैसे पेड़ – पौधे, पशु- पक्षियों का संरक्षण करके और साफ सफाई करके हम प्रकृति को धन्यवाद कर सकते है। साथ ही नए पौधे भी लगाए जा सकते है जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसे परेशानी को दूर किया जा सकता है।