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Motivational Musings

अपना क्या नुकसान है…

स्वभाव और व्यवहार का आपस में पुराना संबंध है। अगर हमारा स्वभाव अच्छा होगा तो व्यवहार भी अपने आप अच्छा होगा। स्वभाव को अच्छा रखने के लिए हमारी धनात्मक सोंच होना अव्यशयक है। धनात्मक सोंच रखने से इंसान अपनी जिंदगी में जो भी कार्य करता है उसे वे सफलता पूर्वक और बिल्कुल सही ढंग से पूर्ण कर पाता है। धनात्मक सोंच के कारण ही उसे पसंद करने वाले अधिक होते है। धनात्मक सोंच से वे हर बड़े से बड़े दुख को आसानी से हल कर सकता है। हम यह ज़्यादातर देखते हैं कि जो लोग धनात्मक सोंच रखते है वे सदैव सुखी रहते हैं।  उन पर भी मुसीबतें आती है परंतु वे उसे सोंच विचार करके दूर कर लेते है। फालतू में उसे अपने सर से बंधे नही रखते। 

अक्सर चिरचिरे लोगों को देखा जाता है कि वे ज्यादा सोंचते हैं। उस सोंच विचार से उन लोगों के मन मष्तिस्क में कई तरह के अच्छे बुरे विचार आते रहते है। ज्यादा सोंचने वाले व्यक्ति कुछ ही सफल  हो पाते है। चिरचिरे होने की वजह तो कई हो सकती परंतु मुख्य है विश्वास की कमी, किसी का साथ न होना और कोई काम का न होना लेकिन चिरचिरेपन को दूर करने के लिए स्वभाव वे व्यवहार मे परिवर्तन किया जा सकता है। 

स्वभाव दो शब्दों से मिल कर बना है “स्व” और “भाव”। “स्व” यानी स्वंय अर्थात हम और “भाव” का अर्थ है विचार। दोनों शब्द को मिलाने पर बनता है, हमारा विचार। और इसीलिए कहा भी जाता है कि “हमे अपने विचारों पर ध्यान देना चाहिए नही तो वे शब्द बन जाता है। अगर हमारे विचार गलत होंगे तो हम गलत शब्दों का प्रयोग करेंगे। हमारा स्वभाव हमारे वयवहार को इतना बदल देता है कि हमे पता भी नही लगता कि हम कब बुरे व चिरचिरे बन गए।” 

इसी प्रकार किसी व्यक्ति का स्वभाव उसे अच्छा इन्सान से बुरा  बना सकता है और बुरे इन्सान से अच्छा भी बना सकता है। व्यवहार का भी कुछ इसी प्रकार का सम्बंध है। इनदोनो में परिवर्तन करके हम अपना व्यक्तित्व बदल सकते है

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