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Motivational poetry

समझ आयी झटका लगने पर

हर वक्त चलते विचार हैं,
अपनी कोशिश को छोड़,
अपनी मंजिल को छोड़,
चल पड़े थे झुग्नु कि तरह
बिजली की ताड़ पर।
झटका लगने पर ही समझ आया कि,
कबका छोड़ चले मंजिल को,
किसी और की तलाश में।
मेहनत की नदियाँ छोड़
चल पड़े था,
आकर्षण की चिकनी मिट्टी पहनने
अहसास तो था कि कुछ गलत है
लेकिन झटका लगने पर समझ आया
की आकर्षण की चिकनी मिट्टी तो
मेहनत की नदियों से बनी हैं।

– मनीषा कुमारी

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