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Motivational poetry

कर्ज़ न चुकाना

कर्ज़ लेकर न चुकाना,
वो भी एक पाप है।
कर्ज़ चुकाना,
हर किसी का फर्ज़ है।
सताना न किसी को ऐसे,
नहीं तो वो तुझे सतायेगा।
भगवान है हर जगह,
हर तरह से तुझे सतायेगा,
हर तरह से तुझे सबक सिखाएगा।

– मनीषा कुमारी

4 replies on “कर्ज़ न चुकाना”

कर्ज बहुत सोच समझ कर देना चाहिए, नहीं तो बाद में अपने ही पैसे भिखारी की तरह मांगने पड़ते हैं

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सच में यार, पैसे उधार न दो तो नाराज हो जाते हैं, रिश्ते खराब न हो और मुसीबत में सबकी मदद करनी चाहिए, ये सोच कर मदद कर दो तो वो भी मुसीबत
समझ नहीं आता कि करें तो करें क्या

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