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Motivational Musings poetry

भावों की पकड़

दिन रात सोंचना,
भागदौड़ फिर सोंचना,
कभी खुश होना,
कभी रोना,
कभी कभी,
गुस्सा न बर्दाश्त होना,
चलना फिर रुक जाना,
सारे लक्षण हैं हमसे,
भावों की पकड़ का न होना।
भावों की पकड़ में इंसान,
बहोत शांत होता है।
भावनाओं में बहने से,
इंसान ही बह जाता है।
शांत से अशांत होजाना,
सारे लक्षण हैं हमसे,
भावों की पकड़ का न होना।

– मनीषा कुमारी

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