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Motivational poetry story

मणि और सनी

एक था मणि,
जिसका न कोई पहचान था,
जंगल जंगल भटकता था,
धीरे धीरे फिर पहचान बना
बनते बनते नाम बना।
आगे बढ़ा सपने सजाये,
लोग रोके तो भी न रुके,
सपनों को अपने गढ़ते जाए।
फिर उसका साथी आया,
नाम अपना सनी बताया।
सपने थे उसके भी बड़े,
लेकिन पल पल वो रो देता था।
मेहनत बहुत करता था,
लोगों से वो डरता था,
लोगों के कुछ कहने भर से,
मायूस वो हो जाता था।
मणि ने उससे दोस्ती की,
दिल की बात सनी ने कही।
मणि बहोत समझदार था,
उसने फिर सनी को समझाया,
दुनिया सारी शिक्षक हमारी,
लोगों की बातें गुरु हमारी,
खट्टी मीठी इसकी कहानी।
अच्छी सिख पास रख लेना,
बुरी बातों को नकार देना।
मंजिल है तुम्हारी खुद को बनाना,
अब आगे तुम बढ़ते जाना।
दोनों फिर साथ रहे,
सुख दुख सब बाँट लिए
खुद को बना आगे बढ़े।

– मनीषा कुमारी

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