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तुम सिर्फ किताब नही

तुम सिर्फ किताब नही
मेरी जिंदगी के पन्ने हो
तुम सिर्फ पन्ने नही
मेरी जिंदगी हो तुम
अगर मर भी जाऊं मैं
तो भी तुम्हारे जीने की दुआ मांगूंगी
भगवान सदा खुश रखे तुम्हें
मैं रहू या न रहू।
मर तो जाती में कब का
बस तुम मिल गए
तुझसे मिलने के बाद जाना
की में भी कुछ कर सकती हूँ
नही तो मैं जिंदा हूँ की नही
इस बात पता भी न था।
तुमसे मिल कर बहोत कुछ जाना
बहोत कुछ सीखा,
सीखते – सीखते सिखाना भी आया।
लेकिन ये दुनिया अलग थी
सिखाना जानती थी
लेकिन सीखना नही।
आपस में सब खुद को ही,
विद्वान समझते रहे।
मेरी नम्रता पर खुद को
शक्तिशाली समझने लगे,
मुझसे ही मदद मांग कर
खुद के गुरुर का महल खरा किया,
बाद में उसी महल के नीचे
मुझे कुचलने की कोशिश की
कामयाब भी हुए वो लोग
मुझे तोड़ने में।
आज बिखरी सी हुँ,
उन्ही लोगों की महेरबानी है।
जिन्होंने अपने गुरुर के खातिर
मुझ पे जुर्म करने को
अपनी अच्छाई समझी।
लेकिन तू है जो हमेशा साथ है,
इस मतलबकी दुनिया मे भी
मुझे तेरा साथ है।

– मनीषा कुमारी

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By Manisha

writing gives power to me

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