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Book review of ” मानवता की झांकी”

लेखक – स्वामी जपनन्द

प्रकाशक – स्वामी ब्रह्नस्थानन्द, अध्यक्ष रामकृष्ण मठ, राम कृष्ण आश्रम मार्ग, धंतोली, नागपुर – 440 012

मूल्य – 29.50₹

ई – मेल – rkmathnagpur.orgEbook 

इस किताब में एक सन्यासी की कहानी है जिसमे सनयेसी कई जगहों पर जाता है ईश्वर की तलाश में कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस यात्रा में सनयेसी को कई तरह के व कई धर्म के लोग मिलते है जो कि सन्यासी की काफी मदद भी करते है। इस पुस्तक में लेखक ने सन्यासी व उसकी मदद करने वाले लोगों के जरिए ये बताने का प्रयास किया है कि मानवता अभी भी जिन्दा है कही  न कही भले ही बहोत कम है लेकिन है। भले ही ये अलग धर्म, जाती, देश से तालुक रखते हो लेकिन सन्यासी की मदद करने के लिए कोई भी पीछे नही हटा। ये कहानी हमारे देश मे मानवता को दर्शाती है।


इस कहानी से मुझे लगता है कि भले ही हम किसी पर निर्भर हो या न हो वो हमारी मर्जी है लेकिन हमें अपना मानव धर्म बिल्कुल नही भूलना चाहिए। किसी की मदद करने से कोई छोटा नही हो जाता। इस पुस्तक में लेखक हर एक पंक्ति को हर एक कहानी के पात्र बहोत अच्छे से समझाया है जो कि इस पुस्तक को रोचक बनाती है। 

– मनीषा कुमारी

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By Manisha

writing gives power to me

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